
जमशेदपुर : आधुनिक भारत के औद्योगिक विकास और वैज्ञानिक सोच की मजबूत नींव रखने वाले ऐतिहासिक ‘पहलों’ के सूत्रधार पी एन बोस (प्रमथ नाथ बोस) का नाम राष्ट्र निर्माण की गाथा में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल जे एन टाटा के विज़न को आकार दिया, बल्कि पीढ़ियों तक भारतीयों को देश के वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
READ MORE :JAMSHEDPUR NEWS: जमशेदपुर पुस्तक मेले का भव्य आगाज, नेशनल टॉपर शांभवी बोलीं- ‘मोबाइल को नहीं, किताबों को बनाएं अपना दोस्त’
एक ऐतिहासिक पत्र और जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना
पी एन बोस का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक योगदान जमशेदपुर में भारत के पहले एकीकृत इस्पात संयंत्र (टाटा स्टील) की स्थापना माना जाता है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में अधिकारी रहते हुए उन्होंने मयूरभंज राज्य में “अत्यंत समृद्ध और विशाल लौह अयस्क भंडार” की खोज की थी। उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी जे एन टाटा को एक ऐतिहासिक पत्र लिखकर दी। इसी पत्र के आधार पर जे एन टाटा ने अपनी पूंजी और व्यावसायिक दूरदृष्टि का इस्तेमाल करते हुए जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट की नींव रखी, जिसने भारतीय भारी उद्योग की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी।
पहली साबुन फैक्ट्री से लेकर असम में पेट्रोलियम की खोज तक
12 मई 1855 को गाइपुर में जन्मे पी एन बोस ने अपनी शुरुआती शिक्षा कृष्णनगर कॉलेज और सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से प्राप्त की। 1874 में उन्हें लंदन में उच्च शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित गिलक्रिस्ट छात्रवृत्ति मिली। भारत लौटने के बाद उन्होंने नर्मदा घाटी, रीवा और शिलांग पठार में कई महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किए। पी एन बोस को ही भारत की पहली साबुन फैक्ट्री स्थापित करने और असम में पेट्रोलियम की खोज का श्रेय भी दिया जाता है। उनके शुरुआती शोध का विषय शिवालिक जीवाश्म थे, जो आज भी ब्रिटिश म्यूज़ियम में सुरक्षित हैं।
READ MORE :Chaibasa News: कोल्हान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के छात्र 6 दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर गंगटोक रवाना
शिक्षा के प्रति समर्पण और जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना
पी एन बोस का मानना था कि भारत का पुनर्जागरण उसकी मूल सांस्कृतिक परंपराओं और विज्ञान पर टिका है। अपने समय में उन्होंने उस प्रचलित धारणा का कड़ा विरोध किया जिसमें भारतीय वैज्ञानिकों को यूरोपीय वैज्ञानिकों से कमतर माना जाता था। जब लार्ड कर्ज़न ने जे एन टाटा के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस की स्थापना के प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश की, तब बोस ने इसका डटकर विरोध किया।
अपनी पुस्तक “नेशनल एजुकेशन एंड मॉडर्न प्रोग्रेस” के जरिए उन्होंने तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया। उन्हीं के अनथक प्रयासों से बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट की स्थापना संभव हुई, जिसे आज कोलकाता की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी के रूप में जाना जाता है। वे इसके प्रथम मानद प्राचार्य भी थे।
देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी उनके बारे में कहा था कि पी एन बोस उस समय भी कोयला और लौह अयस्क के माध्यम से औद्योगिक प्रगति की अपार संभावनाएं देख पा रहे थे। प्राकृतिक संसाधनों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उनके प्रयास आज भी हर भारतीय के लिए एक मिसाल हैं।


