जमशेदपुर
जमशेदपुर क्वियर सर्कल की ओर से रविवार को साकची स्थित आई हॉस्पिटल के समीप ट्रांसजेंडर पर्सन्स (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में एक शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय के स्व-पहचान के अधिकार को सीमित करता है और उनकी गरिमा व स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.
गौरतलब है कि इस विधेयक को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसमें चिकित्सा बोर्ड की अनिवार्यता जैसे प्रावधान समुदाय के अधिकारों के खिलाफ हैं.
विरोध प्रदर्शन में 70 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य, LGBTQIA+ समूह, सहयोगी (allies), विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया प्रतिनिधि शामिल थे.
प्रतिभागियों ने “हमारे बारे में कोई निर्णय, हमारे बिना नहीं” और “समान अधिकार, समान सम्मान” जैसे नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की. प्रदर्शन के दौरान एक ट्रांसजेंडर प्रतिभागी ने कहा कि यह विधेयक उनकी पहचान और अधिकारों को कमजोर करता है, जबकि एक सहयोगी युवा ने इसे व्यापक मानवाधिकार का मुद्दा बताया. वहीं, एक NGO प्रतिनिधि ने सरकार से समुदाय के साथ संवाद कर वास्तविक परिस्थितियों को समझने की अपील की.
वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित विधेयक को वापस लिया जाए या संसदीय समिति को भेजा जाए, ताकि व्यापक परामर्श के बाद एक समावेशी और अधिकार-आधारित कानून बनाया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि 23 मार्च 2026 को लोकसभा में प्रस्तावित चर्चा से पहले समुदाय की प्रमुख मांगों को शामिल किया जाना चाहिए जो निम्नलिखित हैं–—स्व-पहचान का अधिकार बहाल करना, चिकित्सा बोर्ड की अनिवार्यता समाप्त करना और निर्णय प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना.
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जमशेदपुर क्वियर सर्कल के प्रतिनिधियों ने कहा कि संगठन हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इस तरह के शांतिपूर्ण आंदोलनों के जरिए जागरूकता बढ़ाता रहेगा.
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समानता, गरिमा और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया.




