
जमशेदपुर: शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचारों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के उद्देश्य से जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी (Jamshedpur Women’s University) के खरकई ऑडिटोरियम में आयोजित इग्नू (IGNOU) बी.एड. कार्यशाला का तृतीय दिवस अत्यंत सफलतापूर्वक और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यशाला में शिक्षण कौशल को बेहतर बनाने और आईसीटी (ICT) आधारित नवाचारों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कार्यशाला समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा के कुशल मार्गदर्शन में “इतनी शक्ति हमें देना दाता” के सामूहिक प्रार्थना गायन से हुई, जिसने वहां उपस्थित सभी शिक्षार्थियों और प्रतिभागियों के भीतर एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
5E मॉडल: शिक्षण को प्रभावी और रोचक बनाने की कुंजी
कार्यशाला के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. मनोज कुमार ने “पाठ योजना के पाँच ई (5E) प्रतिमान” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों और प्रतिभागियों को 5E मॉडल— एंगेज (Engage), एक्सप्लोर (Explore), एक्सप्लेन (Explain), इलेबोरेट (Elaborate) और इवैल्यूएट (Evaluate)— की उपयोगिता के बारे में बारीकी से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आधुनिक प्रतिमान को अपनाकर शिक्षण प्रक्रिया को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उसे अधिक प्रभावी, रोचक और पूरी तरह से बालक-केंद्रित (Child-centric) बनाया जा सकता है।
शिक्षण-अधिगम में ICT संसाधनों और स्मार्ट क्लास का एकीकरण
इसके बाद द्वितीय सत्र में डॉ. मनोज कुमार ने आधुनिक शिक्षा की सबसे बड़ी जरूरत “शिक्षण-अधिगम में आईसीटी (ICT) संसाधनों का एकीकरण” विषय पर अपना महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए स्मार्ट क्लास, विभिन्न ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों (Online Teaching Tools) और ई-कंटेंट (E-content) के कक्षा में प्रभावी उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। मध्याह्न भोजन अवकाश के दौरान सभी प्रतिभागियों ने आपसी संवाद किया और शिक्षा में आ रहे इन नए डिजिटल बदलावों पर अपने-अपने अनुभव साझा किए।
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श्रव्य-दृश्य सामग्री और स्थानीय संसाधनों से अधिगम निर्माण
कार्यशाला के तृतीय और चतुर्थ सत्र का सफल नेतृत्व डॉ. सुचिता भुइयां ने किया। उन्होंने “शिक्षण-अधिगम के लिए श्रव्य-दृश्य (Audio-Visual) कार्यक्रमों का निर्माण” विषय पर चर्चा की। डॉ. सुचिता ने बताया कि बच्चों की एकाग्रता और विषय में रुचि बढ़ाने के लिए ऑडियो-वीडियो सामग्री की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, उन्होंने “अधिगम संसाधनों का निर्माण” विषय पर जोर देते हुए प्रतिभागियों को कम लागत वाले (Low cost) और स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों के उपयोग से प्रभावी शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तैयार करने की रचनात्मक विधियां सिखाईं। इस सत्र ने शिक्षार्थियों को नवाचारी शिक्षण सामग्री के निर्माण के लिए काफी प्रेरित किया।
दिनभर चली इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला का औपचारिक समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह सत्र सभी भावी शिक्षकों के शिक्षण कौशल और व्यावसायिक दक्षताओं के विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।



