
जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पाण्डेय, डीएफओ सबा आलम अंसारी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर पूरी तरह से लगाम लगाना और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना था।

28 दिनों के महाअभियान में 906 टन अवैध खनिज और 24 वाहन जब्त
बैठक में टास्क फोर्स द्वारा हाल ही में की गई बड़ी कार्रवाई के आंकड़े पेश किए गए। अधिकारियों ने बताया कि 18 मई 2026 से 14 जून 2026 तक जिले में अवैध खनन के खिलाफ एक सघन अभियान चलाया गया। इस 28 दिनों की अवधि में कुल 20 मामलों में बड़ी कार्रवाई की गई।
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906 टन अवैध खनिज जब्त किया गया (जिसमें 812 टन बालू, 74 टन चिप्स और 20 टन लौह अयस्क शामिल है)।
अवैध परिवहन में लिप्त 24 वाहनों को सीज किया गया, जिनमें 16 हाइवा, 5 ट्रैक्टर और 3 अन्य वाहन (407 श्रेणी) शामिल हैं।
इस दौरान 2 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और दोषियों से 4.13 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
मानसून में एनजीटी (NGT) के आदेश का कड़ाई से पालन: 15 अक्टूबर तक बालू उठाव बंद
बैठक के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों पर विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि एनजीटी के आदेश के आलोक में मानसून अवधि के दौरान 10 जून 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक जिले के सभी बालू घाटों से बालू का उठाव पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखें ताकि इस अवधि में कोई भी अवैध बालू उत्खनन न हो सके।
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क्रशर और ईंट भट्टों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टेढ़ी नजर
पर्यावरण सुरक्षा को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (आदित्यपुर क्षेत्रीय कार्यालय) की रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। विभाग ने बताया कि हाल ही में 2 क्रशर और 2 ईंट भट्टों का औचक निरीक्षण किया गया है। उपायुक्त राजीव रंजन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, प्रमुख परिवहन मार्गों पर वाहनों की ओवरलोडिंग के खिलाफ भी नियमित जांच अभियान चलाने के आदेश दिए गए।
इस बैठक में वन, खनन, परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि विभिन्न अंचलों के अंचलाधिकारी (CO) और थाना प्रभारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।


