जमशेदपुर: नेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी (NIT) जमशेदपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजिनियरिंग विभाग के तृतीय वर्ष के छात्रों ने 25 अप्रैल 2026 को एकता टेलिकम्यूनिकेशन का औद्योगिक दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान से परे औद्योगिक कार्यप्रणाली और आधुनिक मशीनों के प्रत्यक्ष अनुभव से रूबरू कराना था।
READ MORE :SERAIKELA NEWS: निजी स्कूलों की मनमानी पर उपायुक्त का कड़ा रुख, फीस वृद्धि और सुरक्षा को लेकर जारी किए सख्त निर्देश
PCB डिजाइन और ऑटोमेशन की बारीकियों को समझा
दौरे के दौरान इंजीनियरिंग छात्रों को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) डिजाइन के ऑटोमेशन से संबंधित मशीनों और उपकरणों के संचालन की विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों ने निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं को करीब से देखा:
सर्किट डिजाइन: छात्रों को सर्किट डिजाइन की जटिल कार्यप्रणाली समझाई गई।
इलेक्ट्रॉनिक्स एलिमेंट्स: पीसीबी पर लगे विभिन्न प्रकार के कंपोनेंट्स और उनकी भूमिका की जानकारी मिली।
सोलर लाइट ऑटोमेशन: छात्रों ने सोलर लाइट के ऑटोमेशन से संबंधित आधुनिक तकनीक को समझा।
प्रत्यक्ष अनुभव: लैब में किए गए प्रयोगों का उद्योगों में कैसे उपयोग होता है, छात्रों ने इसका सजीव अनुभव प्राप्त किया।
एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच की दूरी पाटने पर चर्चा
यह दौरा डा. अर्जुन कुमार और डा. चंद्रदीप सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस दौरान एनआईटी के शिक्षाविदों ने एकता टेलिकम्यूनिकेशन के संस्थापक डा. नीरज कुमार मिश्रा के साथ भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्य उद्देश्य: अकादमी जगत (Academia) और औद्योगिक कार्यप्रणाली (Industry) के बीच के अंतर को कम करना।
भविष्य की योजना: विभाग और संस्था के बीच भविष्य में प्रोजेक्ट्स पर पारस्परिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। इससे रिसर्च स्कॉलर्स को समाज कल्याण के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने और स्किल डेवलपमेंट का मौका मिलेगा।
READ MORE :Jamshedpur News :कस्तूरबा विद्यालय में भारी अव्यवस्था, विधायक को नहीं पहचान सकीं वार्डन; शिक्षक गायब और किचन में मिली गंदगी
विकसित भारत 2047 की दिशा में एक कदम
डा. नीरज कुमार मिश्रा ने छात्रों के साथ विमर्श करते हुए उन्हें वास्तविक तकनीकी प्रोजेक्ट्स में मदद करने का आश्वासन दिया। उन्होंने औद्योगिक विकास में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के महत्व को रेखांकित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का सहयोग ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कुल मिलाकर, यह दौरा छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान और पेशेवर कौशल को निखारने के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।



