
जमशेदपुर: शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही हमारा मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) भी बेहद अहम है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सोमवार, 10 अगस्त 2026 को जमशेदपुर के करीम सिटी कॉलेज (Karim City College) के मनोविज्ञान (Psychology) विभाग के तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मनोविज्ञान के अलावा अन्य विषयों के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन (Stress Management) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।


तनाव, चिंता और अवसाद से कैसे बचें? विशेषज्ञों ने दिए टिप्स
कार्यक्रम में मुख्य रिसोर्स पर्सन (Resource Person) के रूप में मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर (Manipal Tata Medical College) के अलाइड हेल्थ साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फैजल हसन और श्री शाहरुख खान उपस्थित रहे। दोनों वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने छात्रों को तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) जैसी गंभीर परेशानियों से खुद को सुरक्षित रखने के तरीके बताए। विशेषज्ञों ने जोर देते हुए कहा कि एक स्वस्थ मानसिक स्थिति के लिए उचित और पौष्टिक भोजन, बेहतर जीवनशैली (Lifestyle) और नकारात्मक बाहरी बाधाओं से खुद को दूर रखना बेहद जरूरी है।
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‘मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया तो बिगड़ जाएगा जीवन का संतुलन’
कार्यक्रम की शुरुआत विभाग के प्राध्यापक डॉ. जकी अख्तर के स्वागत भाषण से हुई। वहीं, विषय की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. फिरोज इब्राहीमी ने कहा, “जिस तरह हमारे लिए शारीरिक स्वास्थ्य प्रमुख है, उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य भी अहम है। यदि हमने इस पर भरपूर ध्यान नहीं दिया, तो जीवन का संतुलन शायद कायम न रह सके।”
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‘मोबाइल से दूर रहें छात्र’ – प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे करीम सिटी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में एक बेहद अहम मुद्दे की ओर इशारा किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए कहा, “आज के आधुनिक युग में चिंता और अवसाद युवाओं के बीच एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभर रहे हैं, जिनके परिणाम कई बार घातक होते हैं। मेरा मानना है कि इसमें सबसे बड़ा हाथ ‘मोबाइल’ (Mobile Addiction) का है। बच्चों और छात्रों को चाहिए कि वे अपने बेहतर भविष्य और मानसिक शांति के लिए जहां तक हो सके, खुद को मोबाइल से दूर रखें।”
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कॉलेज के प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


