
जमशेदपुर।


सीतारामडेरा क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह स्थित कल्याणनगर और इंद्रानगर में अतिक्रमण हटाने की संभावित कार्रवाई को लेकर जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू लगातार सक्रिय हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश के मद्देनजर प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए विधायक ने बुधवार को झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ दोनों बस्तियों के चार प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
बारिश में गरीबों को बेघर न करने की अपील
विधायक पूर्णिमा साहू ने मुख्यमंत्री को बस्तीवासियों की वर्तमान स्थिति और विस्थापन से होने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भारी वर्षा के मौसम में गरीब परिवारों का आशियाना उजाड़ना मानवीय दृष्टिकोण से बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस कार्रवाई को तत्काल स्थगित किया जाए। साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा सभी 145 प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सूचीबद्ध करने और सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था होने के बाद ही कोई आगे की कार्रवाई करने की मांग की।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधायक को आश्वस्त किया है कि वे इस मामले में जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगेंगे और आवश्यक विचार-विमर्श के बाद उचित कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद विधायक ने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से भी भेंट कर मामले की जानकारी दी।
प्रशासन और कानूनी स्तर पर भी जारी है पहल
इससे पहले 29 जुलाई को एनजीटी की संभावित कार्रवाई की सूचना मिलते ही विधायक पूर्णिमा साहू तुरंत कल्याणनगर और इंद्रानगर पहुंची थीं। उन्होंने मौके से ही जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन से फोन पर बात कर बरसात में गरीबों के घर न तोड़ने की गुजारिश की थी। 30 जुलाई को वे बस्तीवासियों के साथ उपायुक्त कार्यालय पहुंचीं और एनजीटी के आदेश की प्रति सार्वजनिक होने तक कार्रवाई रोकने तथा पर्याप्त समय देने का आग्रह किया था।
डीसी कोर्ट में अपील दाखिल, हाई कोर्ट जाने की भी तैयारी
बस्तीवासियों और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद अंचल कार्यालय से JPLE वाद के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त कर 4 अगस्त को डीसी कोर्ट में अपील दाखिल की गई है। विधायक पूर्णिमा साहू ने बस्तीवासियों को भरोसा दिलाया है कि न्याय के लिए आवश्यकता पड़ने पर झारखंड उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे कानून का सम्मान करती हैं, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी भी गरीब के साथ अन्याय न हो।



