
JAMSHEDPUR NEWS: झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति इन दिनों अपने सात दिवसीय अध्ययन दौरे पर महाराष्ट्र प्रवास पर है। समिति की सभापति और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के नेतृत्व में इस शिष्टमंडल ने मुंबई में महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पोषण और विकास जैसे गंभीर विषयों पर मंथन किया। इस प्रतिनिधिमंडल में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू और पांकी के विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता भी शामिल हैं।
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अग्रणी कॉर्पोरेट घरानों के साथ संवाद और मंथन
समिति के सदस्यों ने मुंबई में ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन’ (TRIF) और ‘द ब्रिजस्पैन ग्रुप’ द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में देश की कई अग्रणी कॉर्पोरेट संस्थाओं जैसे टाटा ट्रस्ट, अडानी फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन, एक्सिस बैंक फाउंडेशन, एचडीएफसी फाउंडेशन और वेदांता फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन सभी संस्थाओं ने समावेशी और सतत विकास के विभिन्न आयामों पर अपने अनुभव साझा किए। समिति ने महिला एवं बाल विकास के सफल मॉडलों का अवलोकन किया और उन्हें झारखंड में लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।
MITRA कार्यालय का दौरा और नीतिगत चर्चा
अपने प्रवास के दौरान, समिति ने मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित ‘महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ (MITRA) के कार्यालय का भी दौरा किया। यहां सदस्यों ने स्वास्थ्य, कौशल विकास, नीति निर्माण और सुशासन के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की बारीकी से जानकारी ली। समिति की सभापति कल्पना मुर्मू सोरेन ने MITRA द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और झारखंड में भी ऐसे मॉडल को अपनाकर विकास योजनाओं को बेहतर बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद में किया जाने वाला खर्च अभी काफी सीमित है, जिसे बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
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विधायक पूर्णिमा साहू ने उठाया जमशेदपुर का मुद्दा
इस दौरान जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने कॉर्पोरेट संस्थाओं के प्रतिनिधियों से झारखंड और विशेष रूप से अपने विधानसभा क्षेत्र में विकासोन्मुख निवेश बढ़ाने का पुरजोर आग्रह किया।
उन्होंने बैठक में टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र में CSR गतिविधियों की सीमित उपलब्धता पर गहरी चिंता व्यक्त की। विधायक ने कहा, “औद्योगिक नगरी होने के बावजूद इस क्षेत्र में अपेक्षित स्तर पर CSR आधारित विकास कार्य नहीं हो पाए हैं।” उन्होंने कॉर्पोरेट संस्थाओं से अपील की कि वे अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दें।
संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया कि यदि राज्य सरकार स्पष्ट नीति और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से परियोजनाएं उपलब्ध कराती है, तो वे झारखंड में बड़े निवेश पर गंभीरता से विचार करेंगे।



