
JAMSHEDPUR NEWS: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने शुक्रवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विशाल ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ में भाग लेने जा रहे सैकड़ों लोगों के जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ऐतिहासिक समागम आगामी 24 मई को दिल्ली के लाल किले में ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश भर के लाखों आदिवासी शामिल होंगे। इस अवसर पर चंपई सोरेन ने आदिवासी संस्कृति की रक्षा पर जोर दिया और कांग्रेस पार्टी की नीतियों पर जमकर निशाना साधा।
कांग्रेस ने कभी आदिवासियों का भला नहीं चाहा: चंपई सोरेन
स्टेशन पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने देश में आदिवासियों की वर्तमान दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान हमेशा आदिवासियों और मूलवासियों पर लाठियां और गोलियां चलवाने का काम किया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में आदिवासियों की हितैषी होती, तो अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे ‘आदिवासी धर्म कोड’ को 1961 की जनगणना में कभी नहीं हटाती।
बाबा कार्तिक उरांव के डिलिस्टिंग प्रस्ताव की हुई थी अनदेखी
चंपई सोरेन ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि साल 1967 में बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में डिलिस्टिंग (Delisting) का प्रस्ताव पेश किया था। इसमें धर्म बदल चुके लोगों को एसटी (ST) आरक्षण से बाहर करने की मांग की गई थी। संसद की संयुक्त समिति ने 17 नवंबर 1969 को सिफारिश की थी कि जो व्यक्ति आदिवासी परंपराओं को छोड़कर ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लेता है, उसे अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं माना जाना चाहिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 348 सांसदों (322 लोकसभा और 26 राज्यसभा) के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपने के बावजूद, कथित तौर पर ईसाई मिशनरियों के दबाव में कांग्रेस सरकार ने इस विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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भाजपा सरकार में हुआ आदिवासी समाज का वास्तविक विकास
चंपई सोरेन ने कहा कि एक ओर कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों का उत्पीड़न किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता में आते ही आदिवासियों के उत्थान के लिए कई ठोस कदम उठाए। भाजपा सरकार ने आदिवासी विद्यार्थियों के लिए सैकड़ों ‘एकलव्य स्कूल’ बनवाए, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित किया और पीएम जनमन (PM JANMAN) जैसी दर्जनों कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। इसके अलावा, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहली बार एक आदिवासी महिला को बैठाने का गौरव भी भाजपा के कार्यकाल में ही प्राप्त हुआ।
अनुच्छेद 342 में संशोधन और डिलिस्टिंग लागू करने की मांग
झारखंड कांग्रेस द्वारा इस समागम के बहिष्कार की अपील पर पलटवार करते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से आदिवासी विरोधी रही है। आज जब आदिवासी समाज अपनी रूढ़िजन्य परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को बचाने के लिए जागरूक हो रहा है, तो कांग्रेस को परेशानी हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भगवान बिरसा मुंडा के दिखाए रास्ते पर चलकर परंपराओं को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में सरना स्थल, जाहेरस्थान और देशाउली में पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन कर डिलिस्टिंग को जल्द लागू किया जाए।
लाल किले में 24 मई को जुटेंगे लाखों आदिवासी
ज्ञात हो कि 24 मई को नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित इस विशाल जनजाति सांस्कृतिक समागम में देश भर से लाखों आदिवासी जुटेंगे। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के गृह मंत्री अमित शाह होंगे। कार्यक्रम में पूर्व सीएम चंपई सोरेन सहित देश के कई प्रमुख आदिवासी नेता भी शिरकत करेंगे और अपने समाज के अधिकारों की आवाज बुलंद करेंगे।



