
जमशेदपुर। अपने हक और अधिकार की मांग को लेकर कुड़मी समाज एक बार फिर आंदोलन का रुख अख्तियार करने जा रहा है। शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में हुई कोल्हान स्तरीय बैठक में “वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति” का गठन किया गया। इस बैठक में कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल हुए।

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बैठक के उपरांत समिति के संयोजक हरमोहन महतो, शीतल ओहदार और कुड़मी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत 2 नवंबर को हजारीबाग से “कुड़मी अधिकार रैली” के रूप में होगी। इसके बाद अन्य प्रमंडलों में तिथिवार रैलियां आयोजित की जाएंगी। कोल्हान क्षेत्र में रैली का आयोजन जमशेदपुर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ता भाग लेंगे।
शीतल ओहदार ने कहा कि समाज की प्रमुख मांगों में कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने, कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान देने और कुड़मी समाज के शहीदों के अपमान पर रोक लगाने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि इन रैलियों के बाद भी केंद्र सरकार ने समाज की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आर्थिक नाकेबंदी जैसे कठोर कदम उठाने पर भी विचार किया जाएगा।
समिति के संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि कुड़मी समाज का आंदोलन किसी अन्य समाज के विरोध में नहीं है, बल्कि अपनी अस्मिता और पहचान की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में जो विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, वे प्रायोजित हैं और कुड़मी समाज को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी भी समाज की भीड़ से डरने वाले नहीं हैं। कुड़मी समाज डरने वाला नहीं, बल्कि लड़ने वाला समाज है। आने वाले दिनों में किसी भी दमनात्मक प्रयास का जवाब ईंट से नहीं, चट्टान से दिया जाएगा।”
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बैठक में हरिशंकर महतो, सपन महतो, नारायण महतो, प्रणव महतो, संतोष महतो, विशाल चंद्र महतो, सुमित महतो, पिंकी महतो, मोहिता महतो, अनिता महतो, रंजीता महतो, प्रबीर महतो और नेपाल महतो सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।

