
जमशेदपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी एवं पर्वत सम्मेलन का समापन शनिवार को ‘जमशेदपुर घोषणा पत्र’ (Jamshedpur Declaration) जारी होने के साथ हुआ। साकची स्थित मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, जल बिरादरी, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट तथा मिशनY के संयुक्त तत्वावधान में दो दिनों तक मैराथन बैठक चली। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यावरणविदों और प्रतिनिधियों ने भारत के पर्वतीय एवं नदी पारितंत्रों (Ecosystem) के संरक्षण, सुरक्षा और सतत प्रबंधन के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की।
घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु: नदियों और पर्वतों को विधिक अधिकार देने का संकल्प
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इस ऐतिहासिक जमशेदपुर घोषणा पत्र में कुल 10 प्रमुख बिंदु शामिल किए गए हैं। सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि पर्वतीय पारितंत्र देश की जल सुरक्षा, नदियों के पुनर्जीवन, जैव विविधता और करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य आधार हैं। घोषणा पत्र के शुरुआती बिंदुओं में उन पर्वतीय जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) और जलस्रोतों की रक्षा करने का संकल्प लिया गया, जो हमारी नदियों और भूजल भंडारों को जीवन प्रदान करते हैं।
आदिवासी पारंपरिक ज्ञान का सम्मान और संस्थागत व्यवस्था
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आदिवासी और स्थानीय पर्वतीय समुदाय ही इन प्राकृतिक संपदाओं के असली संरक्षक हैं। उनके पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक प्रबंधन में सम्मान और स्थान दिया जाएगा। इसके साथ ही, नदियों और पर्वतों के सुशासन के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित करने और पर्वतीय क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के दीर्घकालिक नियमन हेतु एक समग्र विधिक ढांचा (Legal Framework) तैयार करने की बात कही गई है।
‘पर्वत संरक्षण अधिनियम’ के लिए देशव्यापी परामर्श की तैयारी
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घोषणा पत्र के अनुसार, भारत के पर्वतीय पारितंत्रों के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने हेतु जल्द ही देशव्यापी परामर्श आयोजित किया जाएगा। इस घोषणा की तिथि से एक वर्ष के भीतर विधिक ढांचे का प्रारूप (Draft) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, समाज वैज्ञानिकों, विधिवेत्ताओं और आदिवासी समुदायों से सहयोग का आग्रह किया गया है।
केंद्र और राज्य सरकारों से कानून पारित करने की अपील
जमशेदपुर घोषणा पत्र के अंतिम चरणों में राज्य सरकारों और भारत सरकार से विशेष अपील की गई है। सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि विकसित किए जाने वाले इस विधिक ढांचे पर गंभीरता से विचार किया जाए और इसे “पर्वत संरक्षण अधिनियम” (Mountain Protection Act) के विधेयक के रूप में संबंधित विधानसभाओं तथा लोकसभा एवं राज्यसभा के समक्ष पारित करने हेतु प्रस्तुत किया जाए। सभी संगठनों ने इस घोषणा-पत्र को अंगीकृत करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति खुद को समर्पित किया।


