जमशेदपुर। शहर में स्वास्थ्य जागरूकता और होलिस्टिक हीलिंग की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाते हुए, सोनारी स्थित यूनिवर्सल पीस पैलेस रिट्रीट सेंटर में रविवार को “थायरॉयड रोग मुक्त परिवार” थीम के तहत एक वृहद मल्टी-सेंट्रिक ट्रायल ड्राइव का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। वर्तमान समय की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनुचित खानपान और खराब जीवनशैली के कारण थायरॉयड जैसी बीमारियां घर-घर में तेजी से फैल रही हैं। इसी गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने और लोगों को प्राकृतिक उपचार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस विशेष चिकित्सा एवं योग शिविर का आयोजन किया गया।
विभिन्न संस्थाओं का सराहनीय संयुक्त प्रयास
इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन चिकित्सा विज्ञान और आध्यात्म के बेहतरीन तालमेल के साथ किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पीजेएमसी (PJMC) दुमका और एमजीएमएमसी (MGMMC) जमशेदपुर की एक संयुक्त पहल थी। इस जन-जागरूकता अभियान को सफल बनाने में विश्व विख्यात आध्यात्मिक संस्था ‘राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन’ (माउंट आबू) का विशेष और सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। आधुनिक चिकित्सा के तरीकों और प्राचीन भारतीय योग विद्या का यह अनूठा संगम उपस्थित शहरवासियों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ।
थायरॉयड, हठयोग और राजयोग का वैज्ञानिक कनेक्शन
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बीमारी के मूल कारणों और उसके प्राकृतिक निवारण पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए पीयूष रंजन ने थायरॉयड, हठयोग और राजयोग ध्यान के बीच मौजूद गहरे वैज्ञानिक संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तथ्यपरक जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार हठयोग के विशिष्ट आसन और राजयोग का निरंतर मानसिक अभ्यास शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (अंतःस्रावी तंत्र) को सीधे तौर पर उत्तेजित और सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे थायरॉयड ग्रंथि प्राकृतिक रूप से सुचारू ढंग से कार्य करने लगती है।
हार्मोनल संतुलन और तनाव प्रबंधन पर विशेषज्ञों की राय
कार्यक्रम की अगली महत्वपूर्ण कड़ी में चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञ पूनम मेहता, गौरी भादुड़ी, नीलम चौधरी और सुमित ने भी अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। उन्होंने मुख्य रूप से योग, ध्यान और मानव शरीर में हार्मोनल संतुलन के वैज्ञानिक अंतर्संबंधों पर विस्तृत बात की। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवनशैली में थोड़े से सकारात्मक बदलाव और नियमित ध्यान से हार्मोनल बीमारियों से बचा जा सकता है। वहीं, ब्रह्माकुमारीज संस्थान की बी.के. रागिनी दीदी ने वर्तमान युग में मानसिक तनाव को सभी बीमारियों की मुख्य जड़ बताते हुए, राजयोग को तनाव प्रबंधन (स्ट्रेस मैनेजमेंट) का सबसे अचूक, सरल और प्रभावी साधन करार दिया।
व्यावहारिक सत्र और स्वास्थ्य जांच की सुविधा
यह ट्रायल ड्राइव केवल सैद्धांतिक भाषणों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रायोगिक सत्रों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। उपस्थित लोगों को विशेषज्ञों की देखरेख में हठयोग एवं राजयोग का अभ्यास कराया गया ताकि वे इसे आसानी से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें। इसके अलावा, मरीजों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन करने और सटीक निदान के लिए मौके पर ही 40 ब्लड सैंपल भी एकत्र किए गए। अंत में, आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए, धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस सफल ट्रायल ड्राइव का विधिवत समापन किया गया।




