
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में कला और संस्कृति के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार काम हो रहा है। इसी कड़ी में गीता थिएटर के एक प्रतिनिधिमंडल ने धालभूम वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) शबा आलम अंसारी से उनके कार्यालय में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान गीता थिएटर की टीम ने डीएफओ को अपनी संस्था का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में संपन्न हुए शिकार पर्व (सेंदरा) के दौरान चलाए गए जागरूकता अभियान की समीक्षा करना और आगामी समर कैंप की रूपरेखा पर विशेष विमर्श करना था।
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नुक्कड़ नाटकों के प्रभाव की डीएफओ ने की सराहना
बैठक के दौरान सेंदरा (शिकार पर्व) के दौरान चलाए गए नुक्कड़ नाटक जागरूकता अभियान पर विस्तार से चर्चा हुई। धालभूम डीएफओ शबा आलम अंसारी ने गीता थिएटर नाट्य दल द्वारा प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटकों के प्रभाव की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाट्य कला के माध्यम से दिए गए संदेश का ग्रामीण इलाकों के लोगों और विशेषकर युवाओं पर बहुत ही गहरा और सकारात्मक असर पड़ा है। इस पहल से सदियों पुरानी शिकार जैसी पारंपरिक कुरीतियों पर रोक लगाने और वन्यजीवों के प्रति लोगों में संवेदनशीलता बढ़ाने में वन विभाग को काफी मदद मिली है।
समर कैंप से बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की तैयारी
पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ एक सरकारी अभियान न रखकर इसे जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से आगामी ‘समर कैंप’ के आयोजन पर भी रणनीति बनाई गई। डीएफओ शबा आलम अंसारी ने बताया कि इस कैंप का मुख्य फोकस कला के माध्यम से बच्चों और युवाओं को सीधे प्रकृति के करीब लाना है। इसके जरिए उन्हें वनों के महत्व को समझाने, झारखंड की समृद्ध पारंपरिक कला और संस्कृति का सही ज्ञान देने के साथ-साथ इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है।
पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म पर विशेष जोर
वनों की कटाई और वन्यजीवों पर हो रहे खतरे को देखते हुए इस समर कैंप को इको-टूरिज्म से जोड़ने का भी निर्णय लिया गया है। डीएफओ ने इस कैंप की रूपरेखा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गीता थिएटर की टीम को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी दिए ताकि झारखंड के युवा अपनी माटी और जंगलों से जुड़ सकें।
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बैठक में इन सदस्यों की रही प्रमुख उपस्थिति
इस खास मौके पर वन्यजीव प्रेमी और वन विभाग के अन्य सदस्यों के अलावा गीता थिएटर की ओर से कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से गीता कुमारी, प्रेम दीक्षित, सुष्मिता सरकार, कुमार कुणाल, राम सुंडी, तहीर हुसैन, ताजदार आलम और अनंत सरदार उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने एक स्वर में वनों की सुरक्षा और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।



