
जमशेदपुर की प्रतिष्ठित बाबा बंदा सिंह बहादुर गतका टोली का 23 सदस्यीय जत्था बुधवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन से तख्त हजूर साहिब, नांडेड़ के पावन दर्शनों के लिए प्रस्थान किया। श्रद्धा और उत्साह के साथ संगत ने जत्थे को विदाई दी। यह धार्मिक यात्रा गर्मी की छुट्टियों के दौरान हर साल की तरह आयोजित की गई है ताकि बच्चे और युवा सिख इतिहास, गुरमत परंपराओं, सेवा और गतका जैसी पारंपरिक शस्त्र विद्या से आत्मिक रूप से जुड़ें। यह 8-दिवसीय तीर्थ यात्रा 2 जून तक चलेगी।

संगत और प्रबंधन का संदेश
मानगो गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के महासचिव जसवंत सिंह जस्सू ने जत्थे की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों को गुरुओं के इतिहास, सिख मर्यादा और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना आज अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इसे सिर्फ यात्रा नहीं बल्कि गुरु साहिबानों की शिक्षाओं को आत्मसात करने और आने वाली पीढ़ी को धर्म, सेवा और अनुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ाने का पवित्र प्रयास बताया।
युवा-पीढ़ी में आध्यात्मिकता और सेवा भाव
जत्थे में शामिल बच्चों को गतका, गुरबाणी और सिख इतिहास की शिक्षा दी जाती है। जस्सू ने कहा कि हजूर साहिब की यात्रा बच्चों के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा, साहस, सेवा भाव और पंथ के प्रति समर्पण को मजबूत करेगी। गुरु साहिबानों की शिक्षाएं मानवता, भाईचारे और त्याग का संदेश देती हैं, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज का कर्तव्य है।
जत्थे में शामिल सदस्य
जत्थे में जसवंत सिंह जस्सू, हरप्रीत सिंह, गगनदीप सिंह, लवप्रीत सिंह, मनिंदर सिंह, जगदीप सिंह, ऋषि सिंह, राज सिंह, तरनवीर सिंह, गुरविंदर सिंह, रौनक सिंह, मनप्रीत सिंह, तरनप्रीत कौर, हरसिमरन कौर, हरप्रीत कौर, सिमरन, अंशु कौर सहित अन्य बच्चे और सदस्य शामिल हैं। यात्रा के दौरान समूह की गतिविधियों में गुरबाणी पाठ, सेवा कार्य और गतका प्रदर्शन शामिल हैं।
समाप्ति नोट
यह यात्रा न केवल धार्मिक दायरे में बल्कि सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नई पीढ़ी को इतिहास व संस्कृति का जीवंत अनुभव मिलता है और समुदाय में एकता व सेवा भावना को बढ़ावा मिलता है।


