
जमशेदपुर। झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। जमशेदपुर अब झारखंड का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए बैटरी चालित (इलेक्ट्रिक) वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। बुधवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने अपनी विधायक निधि से खरीदे गए छह बैटरी चालित कूड़ा उठाने वाले वाहनों का भव्य उद्घाटन किया।
यह उद्घाटन जमशेदपुर अक्षेस (JNAC) कार्यालय परिसर में नारियल फोड़कर पारंपरिक रूप से किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर जेएनएसी के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इन अत्याधुनिक छह वाहनों की कुल खरीद पर 14 लाख 70 हजार रुपये की लागत आई है।
संकरी गलियों में सफाई व्यवस्था होगी और भी दुरुस्त
झारखंड में यह अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है। विधायक सरयू राय के विशेष प्रयासों और जेएनएसी की कार्यकुशलता के कारण अब शहर के उन इलाकों में भी सफाई व्यवस्था चमकेगी जहां बड़ी गाड़ियां नहीं जा पाती थीं। बैटरी से चलने वाले इन छोटे और लचीले वाहनों के कारण अब शहर की तंग और संकरी गलियों में जाकर डोर-टू-डोर कूड़ा उठाना बेहद सहज और आसान हो जाएगा।
कुशीनगर के मॉडल से प्रेरित है यह योजना
वाहनों के उद्घाटन के दौरान मीडिया से बात करते हुए विधायक सरयू राय ने इस योजना के पीछे की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले जब वे उत्तर प्रदेश के कुशीनगर गए थे, तब उन्होंने वहां पहली बार बैटरी चालित वाहनों से कचरा उठाते हुए देखा था। वह प्रयोग उन्हें पर्यावरण और कार्यक्षमता के लिहाज से बेहद शानदार लगा।
जमशेदपुर लौटकर उन्होंने इस संबंध में जेएनएसी अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। करीब एक साल की योजना और कागजी प्रक्रिया के बाद आखिरकार आज यह सपना धरातल पर उतर आया है। इससे न केवल कचरा प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि सफाई कर्मियों को भी काम करने में आसानी होगी।
देश में तेल और पर्यावरण बचाने के लिए ‘ग्रीन व्हीकल’ मुफीद
सरयू राय ने ग्रीन एनर्जी पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे बैटरी चालित वाहनों की देश को बहुत जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील कर रहे हैं। ऐसे में यह कदम ईंधन की खपत को कम करने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
इसमें न तो पेट्रोल की जरूरत है और न ही डीजल की, जिससे नगर निकाय का खर्च भी कम होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जमशेदपुर के इस सफल मॉडल को देखकर झारखंड की अन्य नगर पालिकाएं और नगर निगम भी इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।


