जमशेदपुर, 27 अक्टूबर 2026: संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का भी सशक्त जरिया है। इसी भावना के साथ जमशेदपुर के कलाकारों ने वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के साथ एक यादगार शाम बिताई। कलाकार कराओके के बैनर तले रविवार, 25 अक्टूबर को बाराद्वारी स्थित आशीर्वाद भवन ओल्ड एज होम में ‘एक शाम बुजुर्गों के नाम’ शीर्षक से संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
शाम पांच बजे शुरू हुए इस आयोजन में कलाकारों ने अपनी गायकी से वृद्धाश्रम का माहौल खुशनुमा बना दिया। गीत-संगीत के बीच बुजुर्गों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उन्हें स्नेह एवं आशीर्वाद दिया।
गीत-संगीत से बुजुर्गों के चेहरों पर आई मुस्कान
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने एक के बाद एक गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कराओके संगीत के साथ हुई प्रस्तुतियों ने वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्गों को आनंदित किया।आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं था, बल्कि बुजुर्गों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनत्व का अहसास कराना भी था।संगीत की धुनों के बीच बुजुर्गों ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का वातावरण भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना रहा।
विद्या, पूर्णिमा समेत सात कलाकारों ने दी प्रस्तुति
‘एक शाम बुजुर्गों के नाम’ कार्यक्रम में महिला कलाकार विद्या और पूर्णिमा ने अपनी गायकी से श्रोताओं का मनोरंजन किया।वहीं, पुरुष कलाकारों में अमरजीत सिंह, मंटू, गणेश, अरिंदम और विश्वजीत ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।सभी कलाकारों ने सामूहिक प्रयास से इस आयोजन को यादगार बनाने में योगदान दिया।
बुजुर्गों के सम्मान और अपनत्व का दिया संदेश
कलाकार कराओके की इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और अपनत्व की भावना को बढ़ावा देना था।कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के साथ समय बिताना और उनकी भावनाओं को समझना भी सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।आयोजन से जुड़े कलाकारों ने संगीत के माध्यम से बुजुर्गों के जीवन में खुशियों के कुछ पल जोड़ने का प्रयास किया।
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बुजुर्गों ने कलाकारों को दिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के समापन पर बुजुर्गों ने कलाकारों के प्रति स्नेह व्यक्त किया और उन्हें आशीर्वाद दिया।यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके प्रति सम्मान केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके साथ नियमित संवाद और समय बिताने की भावना भी विकसित होनी चाहिए।बाराद्वारी के आशीर्वाद भवन में आयोजित यह संगीतमय शाम कलाकारों की सामाजिक संवेदनशीलता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आई।


