
जमशेदपुर।
समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष श्री राजीव रंजन ने की। समिति के अन्य सदस्यों की उपस्थिति में जिले की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विद्यालयों के उत्क्रमण (Upgradation) से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और सर्वसम्मति से कई अहम फैसले लिए गए।
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46 उच्च और 15 मध्य विद्यालयों का हुआ उत्क्रमण
बैठक के दौरान, झारखंड सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले के विभिन्न प्रखंडों से प्राप्त प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। ई-ई-ए-टी (E-E-A-T) मानकों और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए समिति ने जिले के 46 उच्च विद्यालयों को ‘+2 उच्च विद्यालय’ के रूप में उत्क्रमित करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही, 15 मध्य विद्यालयों को ‘उच्च विद्यालय’ में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों के 2 प्राथमिक विद्यालय बने मध्य विद्यालय
उच्च कक्षाओं के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा के ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में बताया गया कि मुसाबनी प्रखंड के दुर्गम और वन क्षेत्र में स्थित ‘प्राथमिक विद्यालय, बांकई’ के आसपास 5 किलोमीटर की परिधि में कोई भी मध्य विद्यालय उपलब्ध नहीं था, जिससे विद्यार्थियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा जमशेदपुर प्रखंड के ‘प्राथमिक विद्यालय नंदनगर’ का भी प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया। जमीनी हकीकत और छात्रों की जरूरतों को समझते हुए समिति ने इन दोनों प्राथमिक विद्यालयों को ‘मध्य विद्यालय’ में उत्क्रमित करने की मंजूरी दे दी।
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स्थानीय स्तर पर मिलेगी उच्च शिक्षा की सुविधा
इस महत्वपूर्ण निर्णय पर उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा। विद्यालयों के उत्क्रमण से अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही स्थानीय स्तर पर उच्च कक्षाओं में अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी। इससे न केवल ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी, बल्कि शिक्षा तक हर बच्चे की पहुंच और अधिक मजबूत होगी।


