जमशेदपुर: देश के औद्योगिक और रक्षा ढांचों को अधिक सुरक्षित और दीर्घायु बनाने की दिशा में लौहनगरी जमशेदपुर में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार, 09 अप्रैल 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) में ‘अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन’ (Remaining Life Assessment – RLA-2026) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शानदार शुभारंभ हुआ। 10 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन में देशभर से लगभग 150 शीर्ष वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता मशीनों की सुरक्षा और उम्र बढ़ाने की उन्नत तकनीकों पर मंथन कर रहे हैं।
60-70% औद्योगिक ढांचा कर चुका है उम्र पार: डॉ. संदीप घोष
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे CSIR-NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने अपने स्वागत भाषण में एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के पेट्रो-रसायन (Petrochemical), ताप विद्युत (Thermal Power) और खनन क्षेत्रों का लगभग 60 से 70 प्रतिशत औद्योगिक ढांचा अपनी निर्धारित आयु सीमा से अधिक समय से उपयोग में है। ऐसे में किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने और इन ढांचों के सुरक्षित उपयोग को बढ़ाने के लिए ‘शेष आयु आकलन’ (RLA) एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रक्षा और औद्योगिक सुरक्षा के लिए RLA एक रणनीतिक जरूरत: डॉ. जी. सतीश रेड्डी
इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा और विज्ञान क्षेत्र के दिग्गज डॉ. जी. सतीश रेड्डी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि बॉयलर, टरबाइन और दाब पात्र (Pressure Vessels) जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए शेष आयु आकलन अब देश के लिए एक ‘रणनीतिक आवश्यकता’ बन चुका है। रक्षा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और वायुयान प्रणालियों में सुरक्षा से समझौता किए बिना संरचनात्मक आयु बढ़ाना बेहद जरूरी है।
AI का हो इस्तेमाल: डॉ. रेड्डी ने इस प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि RLA का दायरा केवल यांत्रिक (Mechanical) उपकरणों तक सीमित न रखकर विद्युत घटकों (Electrical Components) तक भी बढ़ाया जाना चाहिए।
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दिग्गज कंपनियों और संस्थानों का महाकुंभ
संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू ने बताया कि संस्थान ने ताप विद्युत, तेल, गैस और अंतरिक्ष क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपकरणों की मजबूती के आकलन में ऐतिहासिक योगदान दिया है। इस आयोजन में भारत की कई दिग्गज कंपनियों और संस्थानों का जमावड़ा लगा है। इनमें टाटा स्टील, ओएनजीसी (ONGC), मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL), जोएल (जापान), भारत पेट्रोलियम (BPCL), भारतीय तेल निगम (IOCL), एनटीपीसी (NTPC), आईआईटी खड़गपुर, महिंद्रा रक्षा, जायसवाल नेको, किसको कास्टिंग्स और CSIR-CMERI दुर्गापुर जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इन तकनीकी विषयों पर हो रहा है मंथन
इस दो दिवसीय संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में समय-निर्भर विकृति, तनाव विफलता, सूक्ष्म संरचना प्रतिमान, उन्नत सेंसर्स (Advanced Sensors) और बिना क्षति जांच तकनीक (NDT – Non-Destructive Testing) जैसे अहम विषयों पर शोधार्थियों और विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की जा रही है।
कार्यक्रम का सफल संचालन और समापन धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक डॉ. सुमंता बगुई द्वारा किया गया। इस महामंथन से देश की औद्योगिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।





