
जमशेदपुर। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला। अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के घाटों पर पवित्र स्नान के लिए उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

शहर के दोमुहानी संगम घाट, जहां स्वर्णरेखा और खरकई नदियां मिलती हैं, वहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। यहां सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु जुटने लगे थे। महिलाओं ने पारंपरिक साड़ी पहनकर स्नान किया और सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र व अन्य सामग्री का दान किया।
अन्नू लाल साड़ी, स्थानीय श्रद्धालु ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का स्नान मोक्षदायी माना जाता है। इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
इसी क्रम में ओड़िया समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। उन्होंने केले के पेड़ से बनी छोटी नाव में पान, सुपारी, पैसे, अगरबत्ती और दीया रखकर नदी में प्रवाहित किया। यह परंपरा ओड़िया संस्कृति में “बोइता बंधाना” के नाम से प्रसिद्ध है, जो समुद्री यात्रा की स्मृति में मनाई जाती है।
शहर के अन्य घाटों — सोनारी, कदमा, भालूबासा और बारीडीह में भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। स्नान के बाद श्रद्धालु नए वस्त्र धारण कर दान-पुण्य में लीन नजर आए।
वहीं, केंद्रीय छठ पूजा समिति और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए चाय, नाश्ता, पानी और भोजन की व्यवस्था की। सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम के कर्मियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
सूर्योदय के समय दोमुहानी घाट का दृश्य अत्यंत मनमोहक था — दीपों की रौशनी, घंटियों की ध्वनि और भक्तों के जयघोष से पूरा वातावरण भक्ति भावना से सराबोर हो गया।
कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व आस्था, परंपरा और सामाजिक सद्भाव का सुंदर संगम साबित हुआ

