
जमशेदपुर: समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी पर तीखा प्रहार करते हुए बाल कलाकारों ने शानदार नाट्य प्रस्तुति दी। शहर के ट्राइबल कल्चर सेंटर में भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा – IPTA), जमशेदपुर के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ‘बाल रंग महोत्सव’ का रंगारंग समापन हुआ। इस अवसर पर मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की प्रसिद्ध कहानी “उखड़े खंभे” का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत कर 24 बाल कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

हरिशंकर परसाई की कहानी के जरिए व्यवस्था पर तंज
कई दशकों पहले हरिशंकर परसाई ने अपनी कहानी ‘उखड़े खंभे’ के जरिए देश की भ्रष्ट व्यवस्था और मुनाफाखोरी पर जो करारा व्यंग्य किया था, वह आज भी प्रासंगिक है। महंगाई और भ्रष्टाचार आज भी आम जनता की कमर तोड़ रहे हैं। बाल कलाकारों ने अपनी मजबूत संवाद अदायगी और कर्णप्रिय संगीत के माध्यम से यह संदेश दिया कि एक दिन ऐसी सुनहरी सुबह जरूर आएगी, जब समाज में सब कुछ बेहतर होगा। नाटक की शुरुआत छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘नाचा’ शैली में निर्देशक निसार अली, पार्थ बनर्जी, श्वेता गुप्ता और उनके साथियों ने की, जिसके बाद बच्चों ने कहानी को मुख्य मंच पर आगे बढ़ाया।
‘पापी हो गए नैना’ में दिखी मोबाइल की लत
महोत्सव के दौरान एक और नाटक “पापी हो गए नैना” का चुटीले अंदाज में मंचन किया गया। इसके माध्यम से आज की पीढ़ी में बढ़ती मोबाइल की लत और डिजिटल दुनिया में डूबते बचपन की सच्चाई को बखूबी दर्शाया गया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सैकड़ों दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
‘नाटक बच्चों को बनाता है संवेदनशील’
कार्यक्रम में इप्टा जमशेदपुर के अध्यक्ष प्रो. अहमद बद्र ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि नाटक इंसान को बेहतर इंसान बनाने की एक महत्वपूर्ण विधा है। बचपन से ही रंगमंच से जुड़ने पर बच्चे समाज के प्रति संवेदनशील बनते हैं और यह उन्हें बढ़ती उम्र में भटकाव व बुरी आदतों से भी दूर रखता है।
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24 बाल कलाकारों का हुआ सम्मान
यह सात दिवसीय बाल रंग शिविर प्रसिद्ध फिल्मकार, लेखक और पत्रकार ख्वाजा अहमद अब्बास की स्मृति में आयोजित किया गया था। समापन समारोह में सभी 24 बाल कलाकारों को मंच पर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय सोलोमन और अर्पिता ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी शांति, कामरेड शशि, डॉ. एस के झा, साहित्यकार रणेंद्र, जकारिया और मिथिलेश समेत जमशेदपुर, रांची, हजारीबाग, डाल्टेनगंज और घाटशिला के सैकड़ों कलाकार व दर्शक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।



