
जमशेदपुर: सावन (Sawan 2026) माह की पवित्र अमावस्या के शुभ अवसर पर बुधवार को लौहनगरी जमशेदपुर का जुगसलाई (Jugsalai) क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। जुगसलाई दुखु मार्केट के पास रेलवे लाइन किनारे सत्यनारायण मंदिर रोड स्थित श्री शनिदेव मंदिर में देश की उन्नति और प्रगति की कामना को लेकर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। दामोदर शनि बाबा (Damodar Shani Baba) के सानिध्य में यहां भव्य शनि ग्रह शांति यज्ञ (हवन), तेलाभिषेक और शिव चर्चा संपन्न हुई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और पुण्य के भागी बने।


शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष तेलाभिषेक व हवन
न्याय के देवता भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने और शनि दोषों की शांति के लिए यह विशेष तेलाभिषेक और हवन आयोजित किया गया।
मुख्य पुरोहित पंडित अशोक शर्मा की देखरेख में पांच विद्वान पंडितों ने पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ अमावस्या की विशेष पूजा और हवन संपन्न कराया।
अनुष्ठान के बाद उपस्थित भक्तों ने भगवान शनिदेव से सुख, शांति और देश की समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
यह भी पढ़ें: Jamshedpur News: साकची शिव मंदिर में सुल्तानगंज के गंगाजल से हुआ सहस्त्रघट जलाभिषेक, ‘हर-हर महादेव’ से गूंजा शहर
भजनों से शिव चर्चा का शुभारंभ, ‘शिव ही एकमात्र गुरु’
पूजा और हवन के पश्चात मंदिर परिसर में महिलाओं द्वारा भव्य ‘शिव चर्चा’ (Shiv Charcha) का आयोजन किया गया। सुमन के नेतृत्व में अनिता, बेबी, डॉली, सपना, रानी और शिवानी आदि महिलाओं की टीम ने “हर हर भोला हर हर भोला गुरु कीर्तन…” और “मेरे भोले का डमरू बाजे…” जैसे सुमधुर भजनों से शिव महिमा का गुणगान किया। महिलाओं ने भजनों के माध्यम से यह संदेश दिया कि इस संसार से मुक्ति का एक ही उपाय है— ‘शिव को अपना गुरु मानना’।
इस अवसर पर दामोदर शनि बाबा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि, “सभी के गुरु एकमात्र भगवान शिव हैं। शिव की भक्ति और चर्चा करने से जीवन के सभी दुःख और कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं। शिव का शिष्य बनने मात्र से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है।”
महाप्रसाद का वितरण और आयोजन समिति का योगदान
दोपहर 1:30 बजे से मंदिर परिसर में महाप्रसाद वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक अनवरत चलता रहा। सैकड़ों भक्तों ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। “हर-हर महादेव” और “जय शनिदेव” के जयघोष से शनि मंदिर गूंजायमान हो उठा। महिलाओं के भजन, कीर्तन और संगीत से पूरे इलाके का माहौल शिवमय हो गया था।
आज के इस विशाल और सफल धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से पंडित अशोक शर्मा, मेनका सरदार, बड़ेलाल दूबे, अर्चना दूबे, अरविन्द मिश्रा, धर्मेन्द्र शर्मा, आयुषी शर्मा, नन्दकिशोर ठाकुर, प्रवीण सेठी और रामजी मिश्र आदि का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।



