
जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने दो टूक कहा है कि हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी को व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कल, 3 जुलाई को आहूत जमशेदपुर बंद का उद्देश्य सरकार की विफलता दिखाना नहीं बल्कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रशासन पर दबाव बनाना है। आइंदा इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसका बंदोबस्त प्रशासन करे, ये भी कल के बंद का मकसद है।

सरकार इसे अपने खिलाफ कत्तई न माने। उन्होंने यह भी कहा कि अत्यावश्यक सेवाओं जैसे क्लीनिक, नर्सिंग होम, एम्बुलेंस, दवा की दुकानें बंद से बाहर रहेंगी।
हत्या जैसे मुद्दे पर निजी या सियासी लाभ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए
सरकार को इस बंद को अपने खिलाफ नहीं लेना चाहिए
-ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज का हर वर्ग एकजुट होकर सामने आए
-हर व्यवसायी को मैसेज दें कि शुक्रवार को वह अपनी दुकान न खोलें
-अत्यावश्यक सेवाएं बंद के दायरे से रहेंगी बाहरअपने बिष्टुपुर स्थित आवास पर सर्वसमाज और सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि बंदी तो होगी ही। सरकार को चाहिए कि वह इस बंदी में राह का रोड़ा न बने। उन्होंने कहा कि हमें व्यवसायी वर्ग से अपील करनी चाहिए कि वो कल दुकान न खोलें। जितनी बड़ी कंपनियां हैं, उनके कर्ता-धर्ता से भी दुकान बंद रखने की अपील करनी चाहिए। हमें व्यवसायियों को यह संदेश देना चाहिए कि यह बंदी एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर है। जितनी चिंता हमें है, उतनी ही चिंता आपको भी होनी चाहिए। हम लोगों का प्रयास है कि बिना जोर लगाए कल जमशेदपुर स्वतःस्फूर्त बंद हो और शानदार बंद हो ताकि मैसेज साफ-साफ जाए।
सरयू राय ने कहा कि सरकारी दफ्तरों को भी बंद रखने की अपील की जाए। जितने दुकानदार हैं, उन सभी को यह मैसेज भेजा जाए कि आप अपने प्रतिष्ठान बंद रखें। जो घटना घटी है, वह निंदनीय और शर्मनाक है। इसके लिए किसी समाज या राजनीतिक दल को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। होना तो यह चाहिए कि ऐसी घटना के विरोध में सभी दलों को, सर्व समाज को एक साथ खड़े होकर इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए। ऐसा न हो कि जिस समाज की घटना हो, वही समाज ज्यादा मुखर हो और बाकी समाज पीछे रह जाए। ऐसी किसी भी घटना के खिलाफ सर्व समाज को एकजुट होकर आगे आना चाहिए।
श्री राय ने कहा कि शहर में अड्डाबाजी, जुआबाजी, शराबखोरी, अन्य प्रकार की नशाखोरी की घटनाएं इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि यह सब पुलिस के संरक्षण में चल रहा है। पुलिस को कैसे टाइट रखना है, ये हमें तय करना होगा। उन्होंने कहा कि थानों में शांति समितियां बनाई गई हैं। उनमें बहुत सारे अयोग्य लोगों को भर दिया गया है। उन अयोग्य लोगों को निकालना होगा क्योंकि उनका शांति से कोई लेना-देना है ही नहीं। शांति समिति में जिन्हें भी रखा जाए, उन्हें ठोक-ठठा कर रखा जाए।
इसके पूर्व वरिष्ठ समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने 3 जुलाई की बंदी को सफल बनाना है क्योंकि बीते साल-डेढ़ साल में जितने भी प्रशासनिक अधिकारी आए, किसी की मॉनीटरिंग नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण पाने के लिए एक मजबूत आंदोलन की शुरुआत करनी पड़ेगी, ठीक वैसे ही, जैसे हम लोगों ने रेलवे की समस्याओं को दूर करने के लिए आंदोलन किया था।
झारखंड क्षत्रिय संघ के अध्यक्ष शंभूनाथ सिंह ने कहा कि बीते 5-6 माह में शहर में चापड़बाजी की 1300 घटनाएं हुई हैं। यह चिंतनीय है। यह पुलिस की विफलता को साफ-साफ दिखाती है। उन्होंने कहा कि झारखंड क्षत्रिय संघ कल के बंद को सफल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि शहर में जितने भी समाज हैं, उनमें से हर समाज के दो-तीन लोगों को लिया जाए और एक संयोजन समिति बनाई जाए। यह संयोजन समिति ऐसी किसी भी घटना को रोकने का काम करे।
इसके पूर्व उषा यादव, अजय कुमार, संजय मिश्रा, रमेश कुमार, मुश्ताक अहमद, भास्कर मुखी, अंजलि सिंह आदि ने भी बैठक में अपने विचार रखे। बैठक में डीडी बार हत्याकांड में मृत हिमांशु सिंह की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। मंच संचालन सुबोध श्रीवास्तव ने किया।


