अन्नी अमृता
जमशेदपुर: कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज के आर्ट एंड कल्चरल सेल और हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद सभागार में “प्रेमचंद: साहित्य, समाज और समकाल” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित हुई। दीप प्रज्वलन और मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान शिक्षाविदों और वक्ताओं ने समाज में प्रेमचंद के साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श किया।
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प्रेमचंद का साहित्य है आदर्श जीवन की गीता
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. कृष्णा प्यारे ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों और रूढ़ियों पर करारी चोट की। उनका साहित्य आज के समय में एक आदर्श जीवन की गीता के समान है, जो भटके हुए समाज को सही मार्ग दिखाता है। वहीं, कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. अंतरा कुमारी ने ‘बड़े घर की बेटी’ कहानी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार एक स्त्री परिवार की धुरी होती है और उन्नत चेतना के साथ पारिवारिक एकता को बनाए रखती है।
भारतेन्दु के सच्चे उत्तराधिकारी थे प्रेमचंद
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन राकेश ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कोरी कल्पनाओं से निकालकर यथार्थ के ठोस धरातल पर ला खड़ा किया। वे सच्चे अर्थों में भारतेन्दु हरिश्चंद्र के उत्तराधिकारी हैं, जिन्होंने ‘होरी’ के माध्यम से किसान जीवन के दर्द को साहित्य में उकेरा। मुख्य अतिथि एवं उर्दू विभाग के सेवानिवृत प्राध्यापक अहमद बद्र ने कहा कि आज देश जिन सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है, उसका सटीक चित्रण प्रेमचंद ने सौ साल पहले ही कर दिया था। उनकी कहानी ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’ राष्ट्रप्रेम का सर्वोच्च उदाहरण पेश करती है।
विश्व बंधुत्व और समानता के प्रबल पक्षधर
मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष गुप्ता (करीम सिटी कॉलेज) ने कहा कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को बचाने के लिए प्रेमचंद को पढ़ना आज बेहद जरूरी है। उन्होंने ऐसी राष्ट्रीयता का सपना देखा था जहां समानता हो और शिक्षा का बाजारीकरण न हो। इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच मुंशी प्रेमचंद के जीवन और कालजयी रचनाओं पर आधारित एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित हुई।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रियंका सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सबिता पॉल ने किया। इस बौद्धिक आयोजन में डॉ. एस. खान, डॉ. दुर्गा तमसोय, डॉ. अंशु श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक और लक्ष्मण गोराई, आशीष चौधरी, श्रुति कुमारी जैसे अनेक छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से मौजूद रहे।