
जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में फैला दलमा वन्यजीव अभयारण्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए मशहूर है। हाल ही में इस जंगल की जैव विविधता को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है। वर्ष 1976 में अधिसूचित यह अभयारण्य लगभग 195 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसे पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख पारिस्थितिक परिदृश्यों में गिना जाता है। दलमा मुख्य रूप से अपनी समृद्ध जैव विविधता, मिश्रित शुष्क पर्णपाती जंगलों और हाथियों के आवाजाही गलियारों (कॉरिडोर) के लिए जाना जाता है।

भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक छटा
जमशेदपुर के उत्तर-पूर्व में स्थित इस अभयारण्य की ऊंचाई 300 से 900 मीटर के बीच है, जिसमें चट्टानी ढलान, पठार और घने जंगल शामिल हैं। यहाँ गर्मी का तापमान 28-42°C और सर्दियों में 8-22°C के बीच रहता है, जबकि मानसून में 1200 मिमी तक बारिश होती है। दलमा के जंगलों में मुख्य रूप से साल, बांस, सागौन, महुआ, जामुन, पियासल, पलाश और सेमल के पेड़ पाए जाते हैं। केंदू, बेर जैसी झाड़ियां और कई प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां इसकी वनस्पति विविधता को बढ़ाते हैं। यहाँ मौजूद घास के मैदान हिरण, खरगोश और साही जैसे जीवों को भोजन प्रदान करते हैं।
जंगली जीवों और पक्षियों की विविधता
दलमा वन्यजीव अभयारण्य कई दुर्लभ प्रजातियों का सुरक्षित घर है।
स्तनधारी जीव: इस जंगल में भारतीय हाथी, तेंदुआ, बार्किंग डियर, स्लोथ बियर, विशाल गिलहरी, जंगली सूअर, साही और जंगली बिल्ली पाए जाते हैं।
पक्षी: मोर, ड्रोंगो, ओरीओल, तोता, हॉर्नबिल, उल्लू, चील और कठफोड़वा जैसे पक्षी यहाँ का प्राकृतिक आकर्षण बढ़ाते हैं।
सरीसृप और जलीय जंतु: यहाँ अजगर, मॉनिटर छिपकली, किंग कोबरा और रैट स्नेक मौजूद हैं। वहीं, डिमना झील और मौसमी जलधाराएं मछलियों, मेंढकों और प्रवासी पक्षियों का समर्थन करती हैं।
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संरक्षण की पहल और उभरते खतरे
दलमा अभयारण्य भूजल विनियमन, मिट्टी संरक्षण, कार्बन भंडारण और परागणकों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करता है। हालांकि, वर्तमान में इसे प्राकृतिक आवास के नुकसान, शिकार, जंगल की आग और जलवायु परिवर्तन से गंभीर खतरा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन खतरों से निपटने के लिए शिकार विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं, वाटरहोल और फायर लाइन्स का निर्माण किया जा रहा है, तथा वनीकरण और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। अंत में यह सिफारिश की गई है कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिक हॉटस्पॉट को बचाने हेतु वन गलियारों की रक्षा और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।


