
जमशेदपुर। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार, संस्कृति, अनुशासन और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एफटीएस ने ‘संस्कार गुरुकुल’ का शुभारंभ किया। पहल का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें मजबूत चरित्र, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। संस्कार गुरुकुल का भव्य शुभारंभ पीएच वेलनेस, बिष्टुपुर में आयोजित समारोह में हुआ। कार्यक्रम में एफटीएस के पदाधिकारी, प्रशिक्षक, संस्कार गुरुकुल की टीम, शिक्षिकाएं, अभिभावक और शुभचिंतक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्वेता गोयल ने किया।
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उन्होंने बताया कि 20 सितंबर से प्रत्येक रविवार को एवरारा में संस्कार गुरुकुल की कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। समारोह का शुभारंभ अभिषेक गर्ग के नेतृत्व में तीन बार सामूहिक ओम उच्चारण तथा पीयूष चौधरी द्वारा शांति मंत्र पाठ से हुआ। दीप प्रज्वलित कर गुरुकुल की औपचारिक शुरुआत की गयी। समारोह के मुख्य अतिथि एवं पीएच वेलनेस के संचालक रवि गोयल का एफटीएस अध्यक्ष राजेश मित्तल ने सम्मान किया। इसके बाद एफटीएस अध्यक्ष राजेश मित्तल, चित्रमल धूत, उपाध्यक्ष अभिषेक गर्ग, सचिव संजय गोयल, प्रियंका अग्रवाल, ममता बाकरेवाल, राजेश बाकरेवाल, कमल गुप्ता, महिला समिति अध्यक्ष किरण देबुका, एफटीएस युवा अध्यक्ष सौरव सोनथलिया, उपाध्यक्ष पीयूष चौधरी, रवि गोयल, फिट्स युवा मेंटर एवं संस्कार गुरुकुल की समन्वयक रश्मि गर्ग तथा कोषाध्यक्ष श्वेता गोयल ने दीप प्रज्वलित कर गुरुकुल की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रवि गोयल ने संस्कार गुरुकुल को एफटीएस की दूरदर्शी एवं सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय जीवन-मूल्यों को समकालीन संदर्भ में बच्चों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इस पहल के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। एफटीएस मेंटर एवं संस्कार गुरुकुल की समन्वयक रश्मि गर्ग ने गुरुकुल के विजन, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारी, संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना है। इसके लिए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, रचनात्मकता और व्यक्तिगत विकास से जुड़ी गतिविधियों को आनंददायक एवं सहभागितापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।
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राजेश मित्तल ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व की मजबूत नींव केवल अकादमिक शिक्षा से नहीं, बल्कि संस्कारों और जीवन-मूल्यों से तैयार होती है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एफटीएस युवा अध्यक्ष सौरव सोनथलिया ने एफटीएस युवा द्वारा संचालित विभिन्न पहलों और गतिविधियों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दौरान शिक्षिकाओं स्वाति अग्रवाल, स्नेहा अग्रवाल, शिवानी गोयल और अखांशा गुप्ता का परिचय कराया गया। गुरुकुल की शिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। गुरुकुल की टीम में श्वेता गोयल, प्रेरणा धूत चौधरी, बबीता खेमका, प्रीति गोयल और पीयूष चौधरी शामिल हैं। गुरुकुल की स्थापना एवं इसकी संकल्पना को आकार देने में पीयूष चौधरी और प्रेरणा धूत चौधरी के योगदान की विशेष सराहना की गई। प्रेरणा धूत चौधरी ने गुरुकुल की संरचना, गतिविधियों और मूल्य-आधारित शिक्षण पद्धति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें अपनी जड़ों, भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ा जाएगा। शिक्षण प्रक्रिया में बच्चों की सक्रिय भागीदारी और अनुभव आधारित गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जाएगा। समारोह के अंत में आयोजित संवादात्मक अभिभावक सत्र में शिक्षिकाओं ने अभिभावकों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का समापन पीयूष चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन तथा सामूहिक शांति मंत्र पाठ के साथ हुआ।

