
पारस सिंह झा
देवघर। हिंदी की सेवा में समर्पित संस्थान हिंदी विद्यापीठ में सोमवार को हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। समारोह में हिंदी भाषा की समृद्धि, उसके व्यापक प्रसार और वर्तमान समय में हिंदी के बढ़ते महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में संस्थान के व्यवस्थापक अशोकानंद झा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
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हिंदी समृद्ध भाषा, इसमें आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं
अशोकानंद झा ने कहा कि समय-समय पर हिंदी को दबाने के विदेशी प्रयास किए गए, इसके बावजूद हिंदी लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने हिंदी को समृद्ध भाषा बताते हुए कहा कि इसमें आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे वैदिक सिद्धांतों को विदेशी वैज्ञानिकों ने भी अपनाने का काम किया है। उन्होंने देश में संचालित जॉब ओरिएंटेड कोर्स में हिंदी भाषा को भी अनिवार्य किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हिंदी के प्रति मानसिकता में बदलाव लाकर ही इसे और अधिक फलता-फूलता देखा जा सकता है।
हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग
समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रो. रामनंदन सिंह ने कहा कि हिंदी आज किसी की मोहताज नहीं है और इसका प्रसार विदेशों तक हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का समय आ गया है।
रामसेवक सिंह ‘गुंजन’ ने हिंदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश की परिस्थितियों के बीच हिंदी कहीं हीनता की स्थिति में न चली जाए, यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार हिंदी को राजभाषा का स्थान मिला है, लेकिन राष्ट्रभाषा के रूप में उसे वह दर्जा नहीं मिल पाया है। इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
हिंदी की सरल लिपि और जनसंवाद पर जोर
शिक्षाविद सर्वेश्वर दत्त द्वारी ने हिंदी की लिपि को स्पष्ट और सरल बताते हुए लोगों से इसे अपनाने की अपील की। वहीं सेवानिवृत्त बैंककर्मी अनिल कुमार झा ने कहा कि भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्थान दिया गया है, लेकिन अंग्रेजी को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति अभी भी बनी हुई है।
इससे पहले संस्थान के कुलसचिव कौशल किशोर ठाकुर ने हिंदी को जनसंवाद की सबसे सरल और सहज भाषा बताया। उन्होंने हिंदी को प्रत्येक भारतीय का मान, अभिमान और स्वाभिमान बताया।
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हिंदी की बेहतरी के लिए संकल्प लेने का आह्वान
प्राचार्य डॉ. संजय कुमार खवाड़े, शिक्षक नीतीश द्वारी और साहित्यकार हिमांशु झा ने भी समारोह को संबोधित किया। वक्ताओं ने हिंदी के विकास और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने तथा हिंदी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
समारोह में प्रसिद्ध कवि रविशंकर साह, शम्भू सहाय, पंकज कुमार सिन्हा, संजय कुमार, महेन्द्रनाथ झा, राजेश सरेवार, किशोर झा, सुरेश खोवाला, उदयनाथ ठाकुर, अविनाश परिहस्त, सीतेश वर्मा, संजय प्रसाद झा, सुदीप्त सरकार, संतोष दास, अरुण मंडल, उमेश राउत समेत संस्थान के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

