
खुद को बचाते हुए सेवा कार्य जारी रखें
जमशेदपुर: तखत श्री हरिमंदिर साहब प्रबंधन कमेटी पटना के उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह ने लॉकडाउन में सिख युवाओं द्वारा की जा रही सेवा की भरपूर सराहना की है।
उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मानवता एवं समाज की सेवा करना सिख कौम का फर्ज एवं मूल सिद्धांत है। उपाध्यक्ष के अनुसार खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं सरकार के स्वास्थ्य विभाग के मानक के अनुसार बचाते हुए लोगों की सेवा की जानी चाहिए।
उनके अनुसार लंगर की सेवा की जा रही है परंतु इसके साथ ही दवाइयों तथा अन्य सामग्री की भी सेवा जरूरतमंद के बीच करें तो समाज का और भला होगा।
उनके अनुसार फिलहाल 14 अप्रैल तक सभी को क्वॉरेंटाइन में खुद को रखना है। सोशल डिस्टेंस बना कर रखना है। किंतु इस समय का उपयोग पाठ एवं सिमरन करके गुजारना है। जो कोरोना 19 जैसी महामारी में डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस, वॉलंटियर अपनी बहुमूल्य सेवाएं दे रहे हैं उनकी सलामती के लिए वाहेगुरु से लगातार अरदास करनी है। भारत सहित पूरी दुनिया के मानव कल्याण के लिए भी अरदास करना है।
वहीं उन्होंने सभी वालंटियर एवं गुरु के सेवादारों से अपील भी की है कि वह भारत सरकार के दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन का पूरी तरह से पालन करें।
घर में बैठकर पाठ करें अरदास करें और अरदास कभी बेकार नहीं जाएगी। यह महामारी है और इसे मजाक में नहीं लेना है। पुलिस एवं प्रशासन की हमें सुनना है और जहां जरूरत है उनके निर्देशानुसार ही काम करना है।हमारे देश में हेल्प सुविधाओं की बहुत कमी है और ऐसे में जिंदगी से किसी को खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।
उन्होंने झारखंड बिहार बंगाल उड़ीसा के कई गुरुद्वारों का हवाला देते हुए कहा कि गुरुद्वारों में रोज मर्यादा का पालन हो रहा है। गुरु के वजीर और सेवादार अच्छा काम कर रहे हैं।
गुरु नानक देव जी ने कहा था कि ‘” घर घर अंदर धर्मशाल'”अर्थात इंसान के शरीर दिल आत्मा और मस्तिष्क को ही भगवान का मंदिर बनाना है। जो निर्मल है और जाति धर्म भाषा के वाद से ऊपर केवल एक इंसान का पाठ एवं संदेश देता है। इस महामारी के मौके को हमें अपने जीवन को सफल करने के अवसर में बदल लेना है
उन्होंने झारखंड एवं बिहार सरकार की सराहना करते हुए कहा कि सरकार एवं प्रशासन बड़ी मुस्तैदी के साथ अपना काम कर रहा है और सच्चे नागरिक होने के अनुसार हमें अपने कर्तव्य का पालन भी करना है। पटना साहिब में भी पंथिक मर्यादा के अनुसार धार्मिक कार्य रोजाना संपादित हो रहे हैं।
14 अप्रैल को वैशाखी मनाने के संबंध में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के अगले आदेश का इंतजार करना चाहिए।



