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भारतीय रेलवे ने यात्रियों को आसान और आरामदायक बनाने के लिए कई तरह के प्रयास कर रहा है. इसी दिशा में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल ने टाटानगर से जम्मूतवी तक चलने वाली टाटा – जम्मूतवी एक्सप्रेस में LHB डिब्बे लगाने का फैसला लिया है. LHB तकनीक जर्मन तकनीक है. इससे बने डिब्बे अधिक सुरक्षित होते हैं.।
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22 दिसंबर से टाटा से और 25 से जम्मूतवी से
* रेलवे से मिली जानकारी अनुसार टाटा से 22 दिसंबर को प्रस्थान करने वाली गाङी संख्या 18101 टाटा -जम्मूतवी एक्सप्रेस में एल एच बी रैक से चलेगी। वही 25 दिसंबर को जम्मूतवी से प्रस्थान करने वाली गाङी संख्या 18102 जम्मूतवी -टाटा एक्सप्रेस एल एच बी रैक से चलेगी।
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सप्ताह में तीन दिन चलती है टाटा-जम्मूतवी -टाटा एक्सप्रेस
मालूम हो कि गाङी संख्या 18101/18102 टाटा-जम्मूतवी -टाटा एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन टाटा से और तीन जम्मुतवी से टाटा के लिए प्रस्थान करती है। गाड़ी संख्या 18101 टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस बुधवार,शुक्रवार और रविवार को टाटा से और गाङी संख्या 18102 जम्मूतवी – टाटानगर एक्सप्रेस बुधवार,शनिवार और सोमवार को जम्मुतवी से टाटानगर के लिए प्रस्थान करती है।
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बढ़गी सीटों की संख्या
टाटा -जम्मुतवी- टाटा एक्सप्रेस में LHB डिब्बे लगाए जाने से ट्रेन में स्लीपर और एसी क्लास के डिब्बों में सीटों की संख्या बढ़ जाएगी. इससे अधिक संख्या में यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिल सकेगा. सामान्य कोच की लम्बाई लगभग 22 मीटर होती है. जबकि एलएचबी कोच की लम्बाई लगभग 23.54 मीटर होती है. ऐसे में पुराने डिब्बों में जहां स्लीपर कोच में 72 सीटें होती हैं वहीं LHB में 80 तक सीटें होंगी. 3AC डिब्बे में भी सीटों की संख्या बढ़ जाएगी.
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ट्रेन को LHB में बदलने का ये मिलेगा फायदा
एलएचबी कोच पुराने कंवेशनल कोच से काफी अलग होते हैं. ये उच्च स्तरीय तकनीक से लैस है. पटरियों पर दौड़ते वक्त अंदर बैठे यात्रियों को ट्रेन चलने की आवाज बहुत धीमी सुनाई देती है. साथ ही इस डिब्बों में पुराने कोच की तुलना में जगह अधिक होने से यात्रा आरामदायक होती है. एचएचबी कोच स्टेनलेस स्टील और एल्यूमीनियम से बने होते हैं. जिससे कि यह कोच पहले की तुलना में हल्काहोता हैं. सीबीसी कपलिंग तकनीक के कारण हादसे में दुर्घटना की संभावना कम होती है. दुर्घटना होने के पर भी बोगियां एक-दूसरे पर नहीं चढ़ती है.


