
भुइयाडीह मंे भागवत कथा का सातवां दिन
जमशेदपुर। भुइयाडीह, पटेल नगर, स्लैग रोड़ स्थित प्रीतम मेमोरियल मैदान में श्री हरि गोविन्द सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे भागवत कथा के सातवें दिन गुरूवार को व्यासपीठ पर विराजमान वृन्दावन से पधारे आचार्य हरि जी महाराज ने भक्त सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, श्रीशुकदेव विदाई समेत नौ योगेश्वर संवाद प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की दिव्य ज्योति भागवत में प्रविष्ट हुई इसलिए सर्वश्रेष्ठ ग्रंन्थ कहा गया हैं। भक्ति के बिना जीवन व्यर्थ हैं। भगवान अपने मित्र सुदामा से दो मुट्टी चावल खाकर दो लोक की संपदा प्रदान कर दिया। सुदामा जी के चरित्र से यह सीख मिलती हैं कि प्रत्येक मनुष्य को संपदा एवं विपदा का सामना करना पड़ता हैं। अपने सारे कर्म करते हुए जीवन में भगवान राम का नाम जोड़ लेना चाहिए। परीक्षित महाराज ने सकल पृथ्वी का राज छोड़कर भागवत कथा का आश्रय ले लिया उनको मुक्ति मिल गयी। भगवान अपने प्रमियों से अति प्रेम करते हैं। भगवान ने गोपियों द्धारा भक्ति प्रदान करायी। आचार्य ने आगे कहा कि परमात्मा हर जगह निवास करते हैं। भगवान कृष्ण ने जो कहा उसको हर मनुष्य को ग्रहण करना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के अंदर ईश्वर का वास रहता हैं। आचार्य ने गुरु की महिमा बखान करते हुए कहा कि शिक्षा गुरू अनेक होते हैं, लेकिन दीक्षा गुरू एक होते हैं। जो परमात्मा से जोड़ दें वो गुरू होते हैं। गुरू के बिना जीवन में सद्गति नहीं प्राप्त होती। विद्या के बिना संसार अधूरा है, ज्ञान नहीं मिल पाता। पानी का रंग नहीं होता, उसको जिसके साथ मिला दो उसी में रंग जाता है। हमारा जीवन पानी के समान निर्मल होना चाहिए। जब आप गुरु के शरण में जाते हैं गुरु बनाते हैं, यह तभी होता है। इसी के साथ कथा का विश्राम हुआ।
कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु की कथा का श्रवण करते रहे। कथा पर आधारित झांकी भी प्रस्तुत की गयी जिसे देखकर मौजूद सभी श्रोता भाव विभोर हो गये। सातवें दिन गुरूवार को यजमान के रूप में गोविन्द सरोज, नन्द सिंह, श्रीराम सरोज, दिलीप सिंह, हरि ओम सरोज, डा. एस के तिवारी, महेश कुमार, शांति तिवारी, सविता सिन्हा, हंसा सरोज, श्याम खण्डेलवाल, असीम दास एवं संजय सिंह आदि मौजूद थे। आज ये हुए सम्मानित:- समाजसेवी अमरप्रीत सिंह काले, पवन अग्रवाल, चन्द्रशेखर मिश्रा, गुंजन यादव, रमेश नाग एवं डा. एस के तिवारी, को सम्मानित किया गया।

