
हिंदी विद्यापीठ स्थित गोवर्धन साहित्य महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य स्व. नरसिंह पंडित की पुण्यतिथि शुक्रवार को ‘स्मृति दिवस’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर शिक्षा जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें याद किया और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

महापुरुषों के विचार आत्मसात करने से मिलेगी वैश्विक शांति: अशोकानंद झा
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के व्यवस्थापक अशोकानंद झा ने नरसिंह पंडित की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने पंडित जी के विचारों को वर्तमान समय में बेहद अनुकरणीय बताया।
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अशोकानंद झा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा:
“आज की पीढ़ी के छात्रों को ऐसे महान आदर्शों से अवगत कराना बेहद जरूरी है। यदि लोग पंडित जी के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर लें, तो मनुष्य के दुख का दायरा तो कम होगा ही, साथ ही वैश्विक स्तर पर शांति भी स्थापित की जा सकेगी।”
धतूरा के फूल को गुलाब बनाने का सामर्थ्य रखते थे पंडित जी: डॉ. संजय कुमार खवाड़े
महाविद्यालय के वर्तमान प्राचार्य डॉ. संजय कुमार खवाड़े ने स्व. नरसिंह पंडित के शैक्षणिक कौशल और उनकी दूरदर्शिता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पंडित जी में ‘धतूरा के फूल को गुलाब का फूल बनाने का सामर्थ्य’ था। उनकी स्थापित की हुई गुरु-शिष्य परंपरा आज पूरे समाज के लिए एक अनूठी मिसाल बन चुकी है।
सादा जीवन और उच्च विचार के प्रतीक थे स्व. नरसिंह पंडित
कार्यक्रम में मौजूद बीएड कॉलेज की प्राचार्या डॉ. आशा मिश्रा ने उन्हें ‘सादा जीवन उच्च विचार’ वाले व्यक्तित्व की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि पंडित जी ने अपने पूरे जीवन काल में समाज को सिर्फ देने और उसे बेहतर बनाने का ही काम किया।
वहीं, साहित्य प्रेस प्रबंधक हिमांशु झा ने भी उनके व्यक्तित्व को अनुकरणीय बताया। शिक्षक नीतीश द्वारी ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित जी में बौद्धिकता के साथ-साथ आध्यात्मिकता का भी अद्भुत समावेश था, जो उन्हें एक परिपूर्ण शिक्षक बनाता था।
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पूर्व मुख्यमंत्री पं. विनोदानंद झा के आमंत्रण पर आए थे देवघर
इस भावुक अवसर पर स्व. नरसिंह पंडित के पुत्रद्वय मुनेंद्र पंडित एवं बीरेंद्र पंडित ने भी अपने पिता से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि सन 1954 ई. में उनके पिता नरसिंह पंडित, बिहार के गौरव व भूतपूर्व मुख्यमंत्री पं. विनोदानंद झा के संपर्क में आए थे। उन्हीं के विशेष आमंत्रण पर वे देवघर आए और यहीं के होकर रह गए।
पंडित जी के इस तिरोधान दिवस (पुण्यतिथि) के अवसर पर विद्यापीठ के मीडिया प्रभारी शम्भू सहाय समेत संस्थान के तमाम अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।


