
जमशेदपुर।


जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में एक 23 बर्ष महिला की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालों को लेकर जन विकास मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एमजीएम अस्पताल में मरीजों को समय पर जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलना उनके जीवन के अधिकार और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हाल ही में महिला की मौत के मामले में परिजनों द्वारा वेंटिलेटर नहीं मिलने और इलाज में लापरवाही के लगाए गए आरोपों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सौरभ विष्णु ने बताया कि करोड़ों रुपये की लागत से बना नया एमजीएम अस्पताल भवन बाहर से आधुनिक दिखता है, लेकिन अंदर की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहद कमजोर हैं। अस्पताल में पुराना वेंटिलेटर खराब पड़ा है, जबकि नए वेंटिलेटर की मांग के बावजूद अब तक मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका है। समय पर वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण एक महिला की मौत हो गईं, 16 लिफ्ट में से 14 लिफ्ट खराब होने के कारण बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, दिव्यांगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के 46 वाटर फिल्टर भी खराब पड़े हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। और एम्बुलेंस व्यवस्था बदहाल होने से गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा जिससे उनको भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एमजीएम जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में जीवनरक्षक सुविधाओं की कमी बेहद चिंताजनक है।
विष्णु ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यदि संसाधनों की कमी के कारण किसी मरीज की जान चली जाती है तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता है। सौरभ विष्णु ने NHRC से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, एमजीएम अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं का ऑडिट तथा वेंटिलेटर, आईसीयू बेड, विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। एक भी मरीज की जान इलाज और संसाधनों के अभाव में नहीं जानी चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी कि भविष्य में किसी परिवार को यह दर्द न झेलना पड़े।”


