चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में 26 अक्टूबर को विश्वविद्यालय की गैलरी-4 में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–100 वीक्स अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में 110 एनएसएस स्वयंसेवकों सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों को नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।
कुलपति ने युवाओं से की नशामुक्त समाज बनाने की अपील
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी शक्ति भी।
उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की अपील की। कुलपति ने कहा कि युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना चाहिए।
नशे को ना, जिम्मेदारी को हां का दिया संदेश
कार्यक्रम के संसाधन व्यक्ति डॉ. धर्मेंद्र रजक ने नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जागरूक युवा अपने समुदाय में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।उन्होंने संदेश दिया, “नशे को ना, जिम्मेदारी को हाँ — जागरूक युवा ही नशामुक्त समाज और विकसित भारत की पहचान हैं।”
स्थानीय समुदायों में शराब सेवन के सामाजिक पहलुओं पर चर्चा
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के डॉ. बसंत चाकी ने स्थानीय समुदायों में शराब सेवन से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस विषय को समझने के लिए स्थानीय परिस्थितियों और समुदायों के अनुभवों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
एनएसएस निदेशक डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने शराब सेवन के सामाजिक कारणों और दुष्परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेताओं का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मानवशास्त्र, भूगोल, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग तथा टीआरआई से जुड़े शिक्षण सहायकों को विश्वविद्यालय स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मानित प्रतिभागियों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया, ताकि युवा शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित हों।
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चुर, पिट्टो और खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों में दिखा उत्साह
जागरूकता कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के लिए चुर, पिट्टो और खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया।इन खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्थानीय खेल संस्कृति से जोड़ने, सामूहिक सहभागिता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।कार्यक्रम का संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी कंचन कच्छप और जया जैक्लिन तिर्की के नेतृत्व में किया गया। अंत में कंचन कच्छप ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


