चाईबासा: कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर 1 अगस्त को कोल्हान विश्वविद्यालय (Kolhan University) के स्नातकोत्तर (PG) हिंदी विभाग के तत्वावधान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद को जमीन से जुड़े यथार्थवादी कथाकार के रूप में याद किया और वर्तमान समाज में उनके साहित्य की प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष ने की।
आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद की रचनाएं समारोह में वक्ताओं ने प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था। वक्ताओं ने ‘गोदान’ के मुख्य पात्र ‘होरी’ का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी सीमांत किसान अपनी जमीन खोकर मजदूर बनने को विवश हैं। उनके बच्चे अपनी जड़ों से कटकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रेमचंद ने अपने लेख ‘महाजनी सभ्यता’ में जिस “बिजनेस फॉर बिजनेस” (व्यापारिक मानसिकता) का उल्लेख किया था, वह यथार्थ आज समाज में स्पष्ट दिखाई देता है, जहाँ व्यापार का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना रह गया है और मानवीय संवेदनाएँ पीछे छूटती जा रही हैं।
खेती बन गई है घाटे का सौदा: डॉ. अमर कुमार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पूस की रात’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी किसानों का जीवन अथाह संघर्षों से घिरा हुआ है और आधुनिक दौर में भी खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। किसानों की यह पीड़ा प्रेमचंद के साहित्य में स्पष्ट रूप से झलकती है।
कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता ने दिया समतामूलक समाज का संदेश इस अवसर पर कोल्हान विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपना विशेष संदेश प्रेषित किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का एक सशक्त दर्पण है। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वे प्रेमचंद के साहित्य से प्रेरणा लें और एक संवेदनशील तथा समतामूलक समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
इन प्राध्यापकों ने भी रखे अपने विचार इस विचारपरक संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने भी प्रेमचंद के साहित्य पर अपने विचार व्यक्त किए। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कै
बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉ. संचिता भूईसेन
ओड़िया विभाग के डॉ. बालकृष्ण बेहरा
जनजातीय भाषा विभाग के डॉ. चाकी
संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महता
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संतोष कुमार ने किया, जिसके बाद यह साहित्यिक समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।