चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित टाटा कॉलेज को लगभग दो दशकों (20 साल) के लंबे और उबाऊ इंतजार के बाद आखिरकार एक नियमित (कमीशंड) प्राचार्य मिल गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता के कड़े निर्देश पर डॉ. अमर कुमार को इस ऐतिहासिक महाविद्यालय का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय के इस फैसले को प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
कुलपति अंजिला गुप्ता की दूरगामी सोच: शोध और गुणवत्ता पर जोर
महाविद्यालय में प्राचार्य की नियमित नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुलपति अंजिला गुप्ता की एक व्यापक दृष्टि छिपी है। इस नियुक्ति का प्राथमिक उद्देश्य महाविद्यालय परिसर में सुस्त पड़ चुकी ‘शोध संस्कृति’ (Research Culture) को फिर से जीवित और सशक्त करना है। कुलपति का मानना है कि एक नियमित प्राचार्य के होने से संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जा सकेगा। इसके साथ ही, इस निर्णय का एक प्रमुख लक्ष्य टाटा कॉलेज के उस पुराने शैक्षणिक गौरव को पुनर्जीवित करना है, जिसके लिए यह कभी पूरे अविभाजित बिहार में जाना जाता था।
प्रशासनिक फेरबदल: डॉ. एस. सी. दास का बहरागोड़ा कॉलेज स्थानांतरण
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए डॉ. एस. सी. दास का स्थानांतरण बहरागोड़ा कॉलेज कर दिया गया है। डॉ. दास के पास एक लंबा और समृद्ध प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनुभव है, जिसका लाभ अब बहरागोड़ा के विद्यार्थियों को मिलेगा। विशेष रूप से बहरागोड़ा कॉलेज के ओडिया विभाग में वर्तमान में लगभग 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। डॉ. दास के वहां जाने से उस क्षेत्र के विद्यार्थियों को उनके मार्गदर्शन में उच्च स्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होने की उम्मीद है। उनके स्थान पर अब डॉ. अमर कुमार चाईबासा में टाटा कॉलेज की कमान संभालेंगे।
नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. अमर कुमार से बड़ी अपेक्षाएं
टाटा कॉलेज जैसे विशाल और गौरवशाली संस्थान की जिम्मेदारी अब डॉ. अमर कुमार के कंधों पर है। उनसे विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण अपेक्षाएं हैं। नवनियुक्त प्राचार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ और अनुशासित बनाने की होगी। इसके अलावा, उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे शोध गतिविधियों (Research Activities) को नई गति प्रदान करेंगे और विभिन्न विभागों में नवाचार को प्रोत्साहित करेंगे। उनका मुख्य लक्ष्य संस्थान की प्रतिष्ठा को एक बार फिर नई ऊंचाइयों तक पहुँचाना होगा, ताकि कोल्हान क्षेत्र के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही मिल सके।
टाटा कॉलेज का स्वर्णिम इतिहास: रांची विश्वविद्यालय से भी पुराना है नाता
टाटा कॉलेज, चाईबासा केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि कोल्हान प्रमंडल की शैक्षणिक धरोहर है। इसकी ऐतिहासिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी। यह संस्थान रांची विश्वविद्यालय (स्थापना 1960) के अस्तित्व में आने से भी छह वर्ष पूर्व शिक्षा का अलख जगा रहा था। अविभाजित बिहार के समय से ही यह कॉलेज कोल्हान क्षेत्र के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार रहा है। इस महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर क्षेत्र के अनगिनत गणमान्य व्यक्तियों ने राज्य और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह कॉलेज आज भी अपने समृद्ध इतिहास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।




