बोकारो। झारखंड पुलिस के इतिहास में बोकारो जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक कार्रवाई सामने आई है। बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह ने कर्तव्यहीनता, भ्रष्टाचार और एक हत्यारोपी को बचाने के गंभीर आरोपों में पिंड्राजोरा थाना के सभी पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया है। थाना प्रभारी से लेकर संतरी तक, यानी कुल 28 पुलिसकर्मियों पर यह गाज गिरी है। राज्य के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जब किसी पूरे थाने को ही तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया हो। एसपी कार्यालय द्वारा 11 अप्रैल 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस बड़ी और कड़ी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी गई है। इस घटना से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या था पूरा मामला: युवती के अपहरण और हत्या से जुड़ा है तार
बोकारो पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूरा मामला पिछले साल 2025 में दर्ज एक अपहरण केस से जुड़ा है। 24 जुलाई 2025 को पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खूंटाडीह गांव की रहने वाली रेखा देवी (पति- अन्नत महतो) ने अपनी 18 वर्षीय पुत्री कुमारी पुष्पा महतो के अज्ञात व्यक्ति द्वारा अपहरण किए जाने की लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर 4 अगस्त 2025 को पिंड्राजोरा थाने में कांड संख्या 147/25, धारा 140(3) बीएनएस (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था, लेकिन पिंड्राजोरा थाने के पुलिस पदाधिकारियों ने अनुसंधान में घोर लापरवाही बरती और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया।
सिटी डीएसपी की टीम ने एक दिन में सुलझाई गुत्थी, कंकाल और हथियार बरामद
पिंड्राजोरा पुलिस की संदिग्ध कार्यशैली को देखते हुए, मामले के त्वरित उद्भेदन के लिए बोकारो एसपी ने सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक नई टीम का गठन किया। इस नई टीम ने शानदार काम करते हुए महज एक दिन में ही इस अंधे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली। टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर अपहृता (पुष्पा महतो) के शव के कंकाल की हड्डियां, उसके पहने हुए कपड़े और हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया।
आरोपी के साथ पार्टी करने और गोपनीयता भंग करने का गंभीर आरोप
कांड का खुलासा होने के बाद यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई कि पिंड्राजोरा थाने में पदस्थापित पुलिसकर्मियों ने मामले को सुलझाने में कोई सहयोग नहीं किया। उल्टे, जांच के दौरान अभियोजन पक्ष को कमजोर करने और आरोपी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि थाने के कर्मियों ने जांच की गोपनीयता भंग की, आरोपी को बचाने के लिए पैसे का लेन-देन किया और यहां तक कि आरोपी के साथ पार्टी भी की। इन शर्मनाक हरकतों से आम जनता की नजर में पुलिस की छवि बेहद धूमिल हुई।
निलंबित पुलिसकर्मियों का पूरा विवरण
पुलिस की छवि खराब करने और भ्रष्टाचार के इन गंभीर प्रमाणों के आलोक में बोकारो एसपी ने पिंड्राजोरा थाने में पदस्थापित सभी 28 पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में इन्हें केवल सामान्य जीवन यापन भत्ता देय होगा। निलंबित होने वालों में 10 पुलिस अवर निरीक्षक (पु०अ०नि० / SI), 05 सहायक अवर निरीक्षक (स०अ०नि० / ASI), 02 हवलदार और 11 आरक्षी (Constable) शामिल हैं।





