
जमशेदपुर/आदित्यपुर: आदित्यपुर में हाल ही में शुरू किए गए ‘द सफायर प्रोजेक्ट’ पर विवादों के बादल मंडराने लगे हैं। आरोप है कि यह प्रोजेक्ट जिस भूमि पर शुरू हो रहा है, उसमें समय कंस्ट्रक्शन की 397 एकड़ भूमि भी शामिल है। इस पूरे मामले को लेकर अब अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है और पुलिस व बैंक को भी इस पूरे विवाद से अवगत करा दिया गया है। मामला झारखंड हाईकोर्ट में चले जाने की वजह से अब इस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुकिंग कराने वाले खरीदारों के बीच भी उहापोह की स्थिति बन गई है।
नियमों को ताक पर रखकर नक्शा पास करने और 30 करोड़ के लोन का आरोप
जमशेदपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समय कंस्ट्रक्शन के अनूप रंजन ने कई गंभीर खुलासे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवादित भूमि पर आदित्यपुर नगर निगम ने गलत तरीके से नक्शा पास कर दिया है। यही नहीं, यह भी बताया जा रहा है कि एक बैंक ने भी इस विवादित जमीन पर नियमों को दरकिनार कर लगभग 30 करोड़ रुपये का लोन जारी कर दिया है।
14 एकड़ जमीन पर बाउंसरों के दम पर काम शुरू कराने का दावा
अनूप रंजन ने बताया कि उन्होंने आदित्यपुर के पास स्थित जमालपुर गांव में 397 एकड़ जमीन खरीदी थी और साल 2024 तक वे इस जमीन पर पूरी तरह काबिज थे। इसके बाद साल 2024 में इस भूमि पर ‘द सफायर प्रोजेक्ट’ का भूमि पूजन हुआ। आरोप है कि तब से वहाँ बाउंसर तैनात कर पूरी लगभग 14 एकड़ जमीन पर जबरन काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें अनूप रंजन की जमीन भी शामिल है।
जमीन के बंटवारे का पेच: 60 मालिकों में से सिर्फ 8 ने बेची जमीन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरी जमीन के कुल 60 मालिक हैं। इनमें से केवल आठ साझीदारों ने ही द सफायर प्रोजेक्ट के विकासकर्ताओं को अपनी जमीन बेची है। इन आठ साझीदारों का हिस्सा महज पांच एकड़ के आसपास ही बनता है, जबकि काम पूरी 14 एकड़ जमीन पर धड़ल्ले से चल रहा है।
अनूप रंजन ने बताया कि उन्होंने यह जमीन रंजीत, विजय, अनिल कुम्हार और नुनिबाला दास, बेला रानी दास, बीनापानी दास व शिवानी दास से ली है, जिसका एग्रीमेंट 30 अगस्त 2016 को हुआ था। जमीन मालिकों ने बताया था कि अभी भूमि का आधिकारिक बंटवारा नहीं हुआ है, इसलिए नुनिबाला दास ने कोर्ट में केस दायर कर 59 लोगों को पार्टी बनाया था। दूसरी तरफ, द सफायर के मालिकों ने अन्य आठ साझीदारों से साल 2016 में ही कथित तौर पर गलत तरीके से पूरी जमीन की रजिस्ट्री करा ली।
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रिटायर लोगों की गाढ़ी कमाई दांव पर, बुकिंग अभी भी चालू
इस विवाद का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद ‘द सफायर’ प्रोजेक्ट की बुकिंग धड़ल्ले से चालू है। आरोप है कि ऐसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जो किसी कंपनी या नौकरी से रिटायर हो चुके हैं और जिन्हें एकमुश्त बड़ी रकम मिली है। अनूप रंजन ने चिंता जताते हुए कहा कि जब प्रोजेक्ट का भविष्य ही अधर में है और यह तय नहीं है कि फ्लैट मिलेगा या नहीं, तब भी लोगों की गाढ़ी कमाई को दांव पर लगाकर बुकिंग का दौर जारी है।


