
आदित्यपुर।

टाटा स्टील गम्हरिया परिसर में हाल में हुई हिंसक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शुमार आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया की सुरक्षा आखिर किस भरोसे है? उद्योग जगत का कहना है कि सामान्य पुलिस व्यवस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए अब एक समर्पित सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है। इसी मुद्दे को लेकर सिंहभूम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (SIA) ने झारखंड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (JISF) की मांग फिर से तेज करने का निर्णय लिया है।
“मांग नई नहीं, लेकिन जरूरत अब ज्यादा”
सिंहभूम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में JISF की तैनाती की मांग कई वर्षों से राज्य सरकार के समक्ष उठाई जाती रही है। विभिन्न मंचों पर इस संबंध में ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि उद्योगों की सुरक्षा को लेकर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस व्यवस्था की जरूरत है। इसी उद्देश्य से एसोसिएशन जल्द ही जिले के नए पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी से मुलाकात कर औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेगा और JISF की मांग दोहराएगा।
नए एसपी की सक्रियता से बढ़ी उम्मीद
उद्योग जगत का कहना है कि नए एसपी के पदभार संभालने के बाद पुलिस की कार्यशैली में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है। अवैध बालू खनन, स्क्रैप चोरी, नशे के कारोबार, अवैध शराब, लॉटरी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ लगातार छापेमारी से अपराधियों में दबाव बना है।
सड़कों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक पुलिस की बढ़ी हुई गश्त ने आम लोगों के साथ उद्योग प्रबंधन में भी भरोसा पैदा किया है। कई उद्यमियों का कहना है कि लंबे समय बाद पुलिस की सक्रिय मौजूदगी महसूस की जा रही है।
औद्योगिक क्षेत्र की चुनौतियां अलग हैं
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र केवल फैक्ट्रियों का समूह नहीं है। यहां हजारों छोटे, मध्यम और बड़े उद्योग संचालित हैं। प्रतिदिन हजारों कर्मचारी, सैकड़ों मालवाहक वाहन और करोड़ों रुपये मूल्य का कच्चा माल एवं तैयार उत्पाद यहां से गुजरता है।
ऐसे क्षेत्र में स्क्रैप चोरी, रंगदारी, हिंसक घटनाएं या संगठित अपराध केवल एक उद्योग को प्रभावित नहीं करते, बल्कि पूरे औद्योगिक वातावरण और निवेशकों के विश्वास पर असर डालते हैं।
JISF क्यों मानी जा रही है जरूरी?
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जिला पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है, जबकि औद्योगिक सुरक्षा बल विशेष रूप से उद्योगों की सुरक्षा, संवेदनशील परिसरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा समन्वय का कार्य कर सकता हैं। इसी कारण उद्योग संगठन मानते हैं कि सामान्य पुलिस व्यवस्था और JISF एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। इससे जिला पुलिस पर अतिरिक्त दबाव भी कम होगा और उद्योगों को विशेष सुरक्षा भी मिलेगी।
उद्योगों की सुरक्षा का मतलब रोजगार की सुरक्षा
उद्योग संगठनों का कहना है कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। यहां की सुरक्षा मजबूत होने का सीधा संबंध उत्पादन, निवेश, रोजगार और राज्य के राजस्व से है। यदि उद्योग असुरक्षित महसूस करेंगे तो इसका असर नए निवेश और औद्योगिक विस्तार पर भी पड़ेगा।
अब सरकार की ओर टिकी हैं निगाहें
उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि “सुरक्षित उद्योग ही समृद्ध झारखंड की सबसे मजबूत नींव हैं।” यदि वर्तमान पुलिस की सक्रियता के साथ विशेष औद्योगिक सुरक्षा बल की व्यवस्था भी जुड़ जाती है, तो आदित्यपुर देश के सबसे सुरक्षित औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है।


