
आदित्यपुर:
ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS) ने बच्चियों के साथ बढ़ती दुष्कर्म और हत्या की घटनाओं के विरोध में शुक्रवार को देशभर में अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस मनाया। इसी क्रम में सरायकेला-खरसावां जिला कमेटी की ओर से आदित्यपुर के आकाशवाणी चौक पर नुक्कड़ सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
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पश्चिम बंगाल और राजस्थान की घटनाओं के विरोध में देशव्यापी आंदोलन
संगठन ने पश्चिम बंगाल में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या तथा राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। AIMSS ने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं तथा सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
राज्य इकाई की ओर से राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा गया। ज्ञापन में बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर सख्त रोक लगाने, दोषियों को कठोरतम सजा देने, नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा अश्लील सामग्री के प्रचार-प्रसार पर नियंत्रण की मांग की गई।
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महिलाओं ने कहा- सुरक्षित समाज के लिए कठोर कानून जरूरी
सभा को संबोधित करते हुए मालती देवी ने समाज में गिरते नैतिक मूल्यों पर चिंता जताई और महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता बताई। सुमिति पाठक ने कहा कि सभ्य और सुरक्षित समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें सम्मान तथा सुरक्षा मिलनी चाहिए।
इस दौरान पूनम सिंह, सावित्री गिरी, गुड़िया और मीरा ने भी अपने विचार रखते हुए महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन मौसुमी मित्रा ने किया। उन्होंने अधिक से अधिक महिलाओं से सामाजिक जागरूकता अभियान और जन-आंदोलन से जुड़ने की अपील की।
दोषियों को शीघ्र सजा नहीं मिली तो आंदोलन होगा तेज
AIMSS ने स्पष्ट किया कि यदि बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वाले दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा नहीं दी गई तो संगठन देशव्यापी आंदोलन को और तेज करेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में बिमला सिंह, नीलमणि मुखी, विनोता मुखी, संगीता देवी, मंजुला सिंह, निशा शर्मा, गीता मंडल, माया हालदार, पंचमी लोहार, कुसुम, सावित्री और रूपा सरकार सहित अन्य महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही।
संगठन ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। इसके लिए सरकार, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रभावी कदम उठाने होंगे।




