
आदित्यपुर: जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते जल, वायु और भूमि प्रदूषण को लेकर स्थानीय नागरिकों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। क्षेत्र के पर्यावरणविद अभियंता अमरेश ने जनहित में मांग की है कि आदित्यपुर और जमशेदपुर की बड़ी औद्योगिक कंपनियां प्रदूषण नियंत्रण और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करें।
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सुवर्णरेखा में मरीं मछलियां, वायु गुणवत्ता रैंकिंग में भारी गिरावट
औद्योगिक इकाइयों के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
हाल ही में सुवर्णरेखा नदी में हजारों मछलियों की मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की जांच रिपोर्ट में जमशेदपुर की एक औद्योगिक इकाई को जिम्मेदार ठहराया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, नदी के पानी में BOD (Biochemical Oxygen Demand) का स्तर 439.61 एमजी/लीटर था, जो सामान्य (30 एमजी/लीटर) से 33 गुना अधिक है।
केमिकल युक्त गंदे पानी के कारण सुवर्णरेखा में डिजॉल्व ऑक्सीजन (DO) घटकर मात्र 1.6 एमजी/लीटर रह गई थी, जिससे 2 किलोमीटर के दायरे में मछलियां मर गईं।
‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ में जमशेदपुर की राष्ट्रीय रैंकिंग 2024 के 13वें स्थान से लुढ़ककर 37वें स्थान पर आ गई है और एयर क्वालिटी सुधार का स्कोर भी 168.2 से घटकर 147.3 हो गया है।
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‘पब्लिक अकाउंटेबिलिटी रिपोर्ट’ जारी करने और संवाद की मांग
पर्यावरणविद अमरेश ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य उद्योगों का विरोध करना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जवाबदेही तय करना है। उन्होंने कंपनियों से निम्नलिखित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है:
प्रदूषण नियंत्रण के लिए कंपनियों द्वारा उठाए गए ठोस कदम और लगाए गए उपकरणों की प्रभावशीलता।
CSR के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार पर खर्च की गई राशि का विस्तृत विवरण।
यदि CSR का पैसा झारखंड से बाहर खर्च हुआ है, तो उसका स्पष्ट औचित्य।
उन्होंने सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि प्रशासन प्रमुख औद्योगिक इकाइयों, पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिकों के साथ “सार्वजनिक पर्यावरण एवं CSR संवाद” का आयोजन करे। इसके अलावा, हर साल कंपनियों द्वारा “Environmental & CSR Public Accountability Report” जारी की जानी चाहिए।

