
जमशेदपुर/मानगो: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में आश्विन कृष्ण अष्टमी (शनिवार) को मानगो स्थित स्वर्ण रेखा घाट पर धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ की ओर से एक विशाल और सामूहिक निःशुल्क महातर्पण का आयोजन किया गया। सुबह 8 बजे से शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में ऐसे अज्ञात एवं असहाय पितरों के निमित्त तर्पण किया गया, जिनके कुल में वर्तमान समय में तर्पण करने वाला कोई नहीं बचा है।
महासंघ के 101 आचार्यों ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस सामूहिक महातर्पण को संपन्न कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी घाट पर उपस्थित रहे और अपने पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
16 वर्षों से संस्था स्वयं उठा रही है पूरा खर्च
महासंघ के अध्यक्ष पंडित बिपिन झा ने बताया कि धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ पिछले 16 वर्षों से धर्म की रक्षा और सनातन परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से इस तरह के पुनीत कार्य निःशुल्क करता आ रहा है। इस विशाल आयोजन में होने वाले सभी खर्चों का वहन संस्था स्वयं करती है।
वहीं, महासंघ के प्रवक्ता मुन्ना पाण्डेय ने तर्पण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में श्राद्ध एवं तर्पण से प्रसन्न होकर पितर अपने वंशजों को दीर्घायु, संतान, धन, विद्या तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पंचबली और वृद्धाश्रम में भोजन की व्यवस्था
- दी गई पंचबली: महासंघ के उपाध्यक्ष दिलीप पाण्डेय वत्स ने बताया कि तर्पण के पश्चात सनातन परंपरा के अनुसार ‘पंचबली’ भी दी गई। इसमें गौ माता, श्वान (कुत्ते), कौवा, देवताओं एवं चींटियों के निमित्त दही-चूड़ा तथा विभिन्न पकवान अर्पित किए गए।
- रविवार को वृद्धाश्रम में सेवा: महासंघ के सचिव आचार्य उमेश जी ने बताया कि सेवा कार्य को आगे बढ़ाते हुए रविवार की संध्या 7 बजे महासंघ के सभी आचार्यगण मिलकर वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग माताओं एवं पिताओं को भोजन कराएंगे।
सामूहिक तर्पण में इन आचार्यों की रही प्रमुख भूमिका
इस वृहद सामूहिक तर्पण कार्यक्रम में पं. सुधीर झा, पं. प्रेमचंद्र झा, पं. मनोहर मिश्रा, पं. गंगा ओझा, पं. नत्थु शर्मा, पं. जितेंद्र पाण्डेय, पं. विशेश्वर पाण्डेय, पं. सतेंद्र शांडिल्य, पं. रमेश पाण्डेय, पं. श्याम जी तिवारी, पं. चंद्रभान पाण्डेय एवं पं. दिवाकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में शहर के विद्वान आचार्यगण उपस्थित रहे।


