

मामला –र्स्वणरेखा परियोजना
जमशेदपुर।
र्स्वणरेखा परियोजना के तहत चाण्डिल बॉध के विस्थापितो को 37 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक मुआवजा नही मिला है .सभी विस्थापित मुआवजा को लेकर दर दर भटकने को मजबुर है । सोमवार को आदित्यपुर स्थित र्स्वणरेखा परियोजना भवन अपनी मांगो को लेकर विस्थापित मुक्ति वाहिनी के नेतृत्व में घऱना दिया।
विस्थापित उमापदो महतो ने बताया कि र्स्वणरेखा परियोजना के तहत हमलोगो को विस्थापित हुए 37 वर्ष हो गए ।लेकिन विस्थापितो को अभी तक मुआवजा नही मिला है। 1990 अविभाजित बिहार के पुर्नवास नीति में विस्थापितो को संथाल परगना एवम छोटानागपुर प्रमण्डल में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी में 50 प्रतिशत विस्थापितो को आरक्षण था ।लेकिन आज तक उसका पालन नही हुआ ।
इसी प्रकार से ग्रामीण जितेन्द्र गोप कहते है कि झारखंड सरकार के पुर्नवास नीति को बदल दिया गया और नौकरी वाली बात हटा दिया गया ।वर्ष2012 मे पुर्नवास नीति को फिर से बदल दिया गया और फिर से विस्थापितो को नौकरी देने बात हुई।लेकिन तीन साल हो जाने के बाद भी किसी भी विस्थापितो को नौकरी नही दी गई।
घरना के माध्यम को र्स्वणरेखा परियोजना के प्रशासक को एक ज्ञापन दिया गया और कहा गया कि इस मामले मे जल्द कोई निर्णय नही लिया जाता है तो र्स्वणरेखा परियोजना के खिलाफ जोरदार अंदोलन एक बार फिर होगा।

