
डॉ. अब्दुल मल्लिक, प्लांट मेडिकल ऑफिसर, ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज ,टाटा स्टील लिमिटेड,
जमशेदपुर
‘साइलेंट किलर’ क्यों है हाई ब्लड प्रेशर?
हर साल 17 मई को दुनिया भर में ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) जैसी गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग द्वारा शुरू किया गया यह दिन हमें इस “साइलेंट किलर” के खतरों से सचेत करता है। इसे साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि अक्सर इसके कोई शुरुआती लक्षण नहीं दिखते। कई बार लोगों को अपनी इस बीमारी का पता तब चलता है, जब वे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थिति का सामना करते हैं।
WHO की थीम और भारत में बढ़ता खतरा
इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की थीम है: “मिलकर उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण करें: नियमित रूप से रक्तचाप जांचें और इस साइलेंट किलर को हराएं।” आज यह बीमारी एक बड़ा वैश्विक संकट बन चुकी है। WHO के अनुसार, दुनिया में 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग के 1.4 अरब से अधिक लोग हाई बीपी से पीड़ित हैं। भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां हर चार में से एक वयस्क इसका शिकार है। जागरूकता की कमी और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण लोग इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं।
आखिर क्यों होता है उच्च रक्तचाप?
उच्च रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ धमनियों का कठोर होना इसका एक प्राकृतिक कारण है, लेकिन पारिवारिक इतिहास (जेनेटिक्स) भी अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा हमारी खराब जीवनशैली सबसे बड़ा कारण है। भोजन में बहुत अधिक नमक का सेवन, जंक फूड, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, धूम्रपान, ज्यादा शराब पीना और लगातार मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। किडनी और थायरॉइड की बीमारियों के कारण भी बीपी बढ़ सकता है।
अपने ब्लड प्रेशर की रीडिंग को समझें
इस बीमारी से बचने का पहला कदम नियमित जांच है। आपको अपने रक्तचाप की रीडिंग का मतलब पता होना चाहिए:
सामान्य (Normal): 120/80 mmHg से कम।
प्री-हाइपरटेंशन: 120–139 / 80–89 mmHg के बीच।
स्टेज I हाइपरटेंशन: 140–159 / 90–99 mmHg के बीच।
स्टेज II हाइपरटेंशन: 160/100 mmHg या उससे अधिक।
बचाव और नियंत्रण: स्वस्थ जीवनशैली है सबसे बड़ा हथियार
डॉ. अब्दुल मल्लिक (प्लांट मेडिकल ऑफिसर, टाटा स्टील लिमिटेड, जमशेदपुर) के अनुसार, अनुशासित जीवनशैली अपनाकर हाई बीपी को रोका जा सकता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें:
दिन भर में नमक का सेवन 5 ग्राम से कम रखें।
डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।
रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलें, साइकिल चलाएं या व्यायाम करें।
अपना वजन नियंत्रित करें; 5 किलो वजन कम करना भी फायदेमंद होता है।
सिगरेट और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।
तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
अगर जीवनशैली में बदलाव के बाद भी बीपी कंट्रोल न हो, तो डॉक्टर की सलाह पर एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं नियमित रूप से लें। सही जागरूकता और नियमित जांच से आप एक लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।


