
जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), जमशेदपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियंत्रण (ईसीई) विभाग द्वारा ईएंडआईसीटी (E&ICT) अकादमी के सहयोग से दो राष्ट्रीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। ये दोनों एफडीपी 25 मई से 5 जून 2026 तक संचालित किए गए, जिनका मुख्य विषय “अंडरवाटर रोबोटिक्स एंड एकॉस्टिक कम्युनिकेशन नेटवर्क्स (URACN-2026)” और “एफपीजीए आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम्स डिजाइन (FCSD-2026)” था।

19 राज्यों के 123 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इन दोनों कार्यक्रमों के लिए 50-50 प्रतिभागियों की क्षमता निर्धारित की गई थी, लेकिन विषयों की नवीनता के कारण प्रतिभागियों का भारी उत्साह देखने को मिला। URACN-2026 में 55 और FCSD-2026 में 68 लोगों ने अपना पंजीकरण कराया। इस प्रकार कुल 123 प्रतिभागियों ने देश के 19 विभिन्न राज्यों से इसमें अपनी सहभागिता दर्ज की। इनमें 92 शिक्षक, 11 शोधार्थी और उद्योग जगत से जुड़े पेशेवरों के साथ-साथ स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी शामिल थे।
24 विशेषज्ञ व्याख्यान और 16 हैंड्स-ऑन सेशन
इस दो सप्ताह के एफडीपी के दौरान कुल 24 विशेषज्ञ व्याख्यान (एक्सपर्ट लेक्चर) और 16 हैंड्स-ऑन (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का संचालन आईआईटी, एनआईटी, सीएसआईआर-एनआईओ, डीआरडीओ-एनएसटीएल, सीएमईआरआई, एसटी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और बिट्स हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के 38 विशेषज्ञों द्वारा किया गया। प्रतिभागियों को ANSYS, CATIA, MATLAB, Xilinx Vivado और विभिन्न IoT उपकरणों के जरिए डिजाइन, मॉडलिंग व सिमुलेशन का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह और मुख्य अतिथि
कार्यक्रम के समापन समारोह में सीएमईआरआई दुर्गापुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शंभुनाथ नंदी और आईआईटी पटना के प्रो. प्रीतम कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं, इन कार्यक्रमों का उद्घाटन एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने प्रो. एस. एन. सिंह और प्रो. एस. भौमिक की मौजूदगी में किया था।
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सफल प्रतिभागियों को मिलेगा ई-प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण के अंत में एक ऑनलाइन क्विज का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग सभी प्रतिभागियों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर सफलता हासिल की। सभी सफल प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र (e-certificates) प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. जयेंद्र कुमार, डॉ. मृत्युञ्जय राउत, डॉ. कौशिक दास, अजीत कुमार, शशि प्रकाश और वीणाशीला राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


