
Anni Amrita…


अगर आप ये सोच रहे हैं कि ‘मुसाफिर कैफे’ के ‘सुधा’ और ‘चंदर’ मशहूर साहित्यकार धर्मवीर भारती के ‘गुनाहों के देवता’ के ‘सुधा’ और ‘चंदर’ हैं, तो आप थोड़ा सही और थोड़ा गलत हैं..चूंकि ये युग अलग है और चालीस के दशक के अंत में छपी ‘गुनाहों के देवता’ का युग ही अलग था तो सामाजिक परिवेश और जीवन शैली भी अलग हैं, तो ‘सुधा’ व ‘चंदर’ वही कैसे हो सकते हैं? तब समाज जिन मामलों में कठोर था, आज वैसा नहीं है…यहां ‘सुधा’ और ‘चंदर’ का दुश्मन समाज नहीं है, यहां प्रेम, भावनाएं, आहत करना-आहत होना, पीड़ाएं, जिम्मेदारियां, द्वंद्व, त्याग, सपने और न जाने कितने ही भावनाओं से गुजरकर उनका प्रेम अजीबोगरीब मोड़ पर पहुंच जाता है…यह वेबसीरीज ठहराव और गति साथ लिए चलती है..जिंदगी को लेकर अपने अपने फलसफे की यात्रा कराते-कराते दूसरों की यात्रा में सहयोग और प्रेरणा बनने को भी दर्शाती है..यहां यह ‘गुनाहों के देवता’ के ‘सुधा’ और ‘चंदर’ की कहानी से अलग दिखती है, लेकिन जब बात तकलीफ, तड़प, मजबूरी और उदासी की आती है, तब यह कुछ-कुछ वैसा ही अनुभव कराती है, जैसा ‘गुनाहों का देवता’ कराती है.
पता नहीं क्या कहती है ये वेबसीरीज, मगर एकदम दिल में उतर जाती है. कुछ झटके दे देती है…अंत में कौतूहल दे देती है….
साथ ही, यह भी दर्शाती है कि जिसे हम ‘प्रेम’ कहते हैं, वह attention खोजता है और attention न रहने पर दरार भी आ जाती है…या फिर हासिल करने की जद्दोजहद और जल्दबाज़ी में खतरनाक मोड़ भी ले लेती है…प्रेम और सपने जब आपस में मुठभेड़ करते हैं तब क्या होता है….? जब किसी का ‘प्रेम’ निभाने पर मजबूर करता है, तब क्या नया प्रेम उमड़ता है या मन पुराने में कहीं गुम रहता है? यह सवाल भी छोड़ती है.
सुधा और चंदर के अलावे भी कुछ अन्य महत्वपूर्ण पात्र हैं…खास बात यह भी है कि इसमें महिला और पुरुष दोनों ही पात्र त्याग के लिए तैयार दिखते हैं..यहां यह भी सवाल उठाया गया है कि साथ रहने के लिए शादी की आवश्यकता है क्या? आप इस बात का समर्थन करें या न करें, पर जिस क्षण यह सवाल उठा है, वह आपको स्वाभाविक ही लगेगा…
सुधा के चरित्र में यह दिखा कि वह अपनी जरुरत और हालात के हिसाब से पूरे अधिकार के साथ चंदर के पास आ धमकती है, आगे बढ़कर दोस्ती करती है, मगर अपनी जिंदगी, जिंदगी के महत्वपूर्ण लोग और अपने फैसलों पर चंदर का हक स्वीकार करने को तैयार नहीं..यहां कुछ लोगों के मन में आ सकता है कि जब ‘स्वयं’ इतना महत्वपूर्ण है तो फिर आगे बढ़कर दोस्ती क्यों? मगर, यह भी लोग समझ सकते हैं कि इस दुनिया में अपने बस में कुछ नहीं है और ऐसा अक्सर जिंदगी में साबित होता है कि हालात फैसलों का निर्माण करते हैं.
सबसे बढ़कर इस सीरीज में हिन्दी लेखन और हिंदी उपन्यासकारों पर बातचीत है जो एक लंबे अरसे बाद देखने को मिली…सब कुछ खुलकर नहीं लिखा जा सकता ताकि लोग दिलचस्पी और भावनाओं के उतार-चढ़ाव के साथ देख सकें..एक फिल्मकार को सम्मान देते हुए उतना ही लिखा है, जितना लिखे बिना रहा नहीं गया…
पहले सीजन का अंत जिज्ञासा से भर देता है.
सीरीज के अगले सीजन का बेसब्री से इंतजार….
अन्नी अमृता…
#Netflix


