
जमशेदपुर।
आज का दिन जमशेदपुर के सिख इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया, जब साकची गुरुद्वारा साहिब के प्रधान सरदार निशान सिंह ने सीजीपीसी (सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) द्वारा कराए गए मतदान को “असंवैधानिक और तानाशाहीपूर्ण” करार देते हुए खुलेआम विरोध जताया। सरदार निशान सिंह ने जमशेदपुर की संगत के समक्ष एक सशक्त और भावनात्मक बयान जारी कर सीजीपीसी के अध्यक्ष भगवान सिंह को कटघरे में खड़ा किया।
निशान सिंह ने कहा, “22 जून, 2025 — यह तारीख न केवल जमशेदपुर, बल्कि पूरे सिख समाज के लिए शर्मनाक बन गई है। भगवान सिंह ने अपने व्यक्तिगत अहंकार की तुष्टि के लिए पूरी कौम की गरिमा को तार-तार कर दिया है।”

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निशान सिंह ने आरोप लगाया कि भगवान सिंह और उनके समर्थकों ने साकची गुरुद्वारा के संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध और पक्षपातपूर्ण तरीके से मतदान कराया, जिसमें उनकी पसंद के प्रत्याशी को प्रधान बनाए जाने की कोशिश की गई। निशान सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को “तानाशाही की पराकाष्ठा” बताया और कहा कि संविधानिक प्रक्रियाओं का खुलेआम मजाक उड़ाया गया।
उन्होंने कहा, “भगवान सिंह ने अपने प्रभाव और पद का दुरुपयोग कर गुरुद्वारा प्रबंधन को नियंत्रित करने का प्रयास किया। यह न सिर्फ़ गुरुद्वारा प्रबंधन की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि संपूर्ण सिख समाज के आत्मसम्मान पर हमला है।”
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इस अवसर पर निशान सिंह ने जमशेदपुर के अन्य गुरुद्वारों के प्रधानों से अपील की कि वे इस घटना से सबक लें और सीजीपीसी की राजनीति का शिकार न बनें। उन्होंने सभी प्रधानों को संगठित होकर ऐसी तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध करने का आह्वान किया।


