
जमशेदपुरटाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की टीम लेह क्षेत्र में स्थित स्टोक कांगड़ी (20,180 फीट) के लिए विंटर एक्सपेडिशन का आयोजन करेगी। स्टोक कांगड़ी भारतीय हिमालय में सबसे लोकप्रिय 6000 मीटर की चोटियों में से एक है, जो आमतौर पर गर्मी के मौसम में भारत और विदेशों से पर्वतारोहियों को आकर्षित करती है। हालांकि, सर्दियों में शायद ही कोई इस चोटी पर चढ़ता है, क्योंकि दुरुह स्थिति और अत्यधिक ठंड इसे और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं और चढ़ाई के लिए ठोस तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।
टीएसएएफ विंटर एक्सपेडिशन एक मजबूत तन और मन की मांग करता है। कड़ाके के सर्द वातावरण में ऊंचाई पर पर्वतारोही को कठिन दिनों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होती है। “समिट डे“ पर अपेक्षित तापमान -35° सेल्सियस के आसपास होने की संभावना है, और बर्फीली हवा का तापमान -40° सेल्सियस तक कम हो सकता है।
चढ़ाई की शैली
टीएसएएफ की टीम बिना किसी बाहरी समर्थन के इस समिट का प्रयास करेगी, जो उनकी यात्रा को कठिन बना देगा। लेकिन यह एक तरह से आत्मनिर्भरता की भावना भी भरता है, जो केवल पहाड़ की प्रतिकूलता ही सिखा सकती है। यह ट्रेकिंग की “साहेब“ शैली को त्यागने का एक प्रयास है। टट्टू, खच्चरों, पोर्टरों, रसोइयों और सहायक कर्मचारियों जैसे आम सहयोग से बचा जाएगा यानी ये सब सुविधा नहीं होगी। अपने आउटडोर लीडरशिप कोर्स में टीएसएएफ हमेशा सेल्फ-कुकिंग पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें लोग अपना भार स्वयं वहन करते हैं और सीमित संसाधनों के साथ कार्य करते हैं। इससे, छोटा समूह होने के कारण ट्रेकिंग के दौरान कचरा कम पैदा होते हैं और पहाड़ों के पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है। इसलिए, विंटर समिट एक पर्यावरण-स्नेही तरीका है, जो शून्य अपशिष्ट व आत्मनिर्भर ट्रेकिंग के माध्यम से पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करता है।
इस विंटर एक्सपेडिशन का नेतृत्व टीएसएएफ के सचिव हेमंत गुप्ता करेंगे।
टीम के सदस्य
ऽ हेमंत गुप्ता (कार्य अनुभव – 6 वर्ष। माउंट एवरेस्ट, माउंट एकांकागुआ, आइलैंड पीक, भागीरथी- 2, लोबूचे ईस्ट, रुद्रुगैरा, कनामो की चढ़ाई)
ऽ अस्मिता दोरजी (सीनियर इंस्ट्रक्टर, टीएसएएफ। कार्यानुभव – 11 वर्ष। गंगोत्री, धर्मसुरा, स्टोक कांगड़ी की चढ़ाई)
ऽ धर्मेंद्र सिंह (इंस्ट्रक्टर, टीएसएएफ। कार्यानुभव – 3 वर्ष। द्रौपदी का डंडा और 3 बार माउंट रुद्रुगैरा की चढ़ाई)
ऽ प्रणव ममगैन (मैनेजर, टीएसएएफ। माउंट कनामो की चढ़ाई, एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेकिंग और काला पाथर, बालाचंद्र शिखर, मिशन गंगे में भागीदारी)
ऽ राजेन्द्र रावत ( इंस्ट्रक्टर, टीएसएएफ। कार्यानुभव – 8 वर्ष। माउंट जोगिन की चढ़ाई, कालिंदी दर्रा ट्रेकिंग, उŸाराखंड के केदारनाथ में स्वैच्छिक राहत कार्य)
ऽ रथु महतो (इंस्ट्रक्टर, टीएसएएफ। बेसिक और एडवांस्ड पर्वतारोहण पाठ्यक्रम)
ऽ कोंचोक थिंले (गाइड, टीएसएएफ)
ऽ प्रभात गौरव (2017 में एवरेस्ट पर चढ़ाई की, फोटोग्राफर)


यात्रा कार्यक्रम
22 जनवरी जमशेदपुर – दिल्ली
23 जनवरी दिल्ली – लेह
24 जनवरी लेह (3500 मीटर) और उपकरणां का अनुकूलन
25 जनवरी स्टोक गांव (3500मी) तक ड्राइव और चांगमा (4000 मीटर) तक लोड फेरी
26 जनवरी चांगमा में ठहराव (4000 मी)
27 जनवरी लोड फेरी से मौनकार्मो (4300 मीटर)
28 जनवरी मौनकार्मा (4300 मी) में ठहराव
29 जनवरी लोड फेरी समिट कैंप (4900 मी)
30 जनवरी समिट कैंप में ठहराव (4900 मी)
31 जनवरी समिट (6153 मी) और बेस कैंप में वापसी
1 फरवरी आरक्षित दिन
2 फरवरी आरक्षित दिन
3 फरवरी वापस स्टोक और लेह तक ड्राइव
4 फरवरी लेह – दिल्ली

