
जमशेदपुर।इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन, नई दिल्ली (‘आईएमएफ’ भारत का शीर्ष पर्वतारोहण निकाय है) ने 2020 में एवरेस्ट क्षेत्र में 8000 मीटर की चार चोटियों पर एक अभियान का प्रस्ताव रखा है, जिनके नाम इस प्रकार हैं – माउंट एवरेस्ट (29028 फीट), दुनिया का चौथा सबसे ऊंचा पर्वत माउंट ल्होत्से (27940 फीट), माउंट नूपत्से (25790 फीट) और माउंट पुमोरी (23494 फीट)। यह अभियान युवा मामले व खेल मंत्रालय से प्राप्त अनुमोदन के साथ किया जा रहा है, जो आईएमएफ को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है।
उपरोक्त अभियानों के लिए सदस्यों का चयन करने हेतू पहला चयन शिविर 2 स्थानों-जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, जम्मू और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग उत्तरकाशी- में आयोजित किया गया था। यहां से 100 उम्मीदवारों में से 50 को माउंट त्रिशूल (7120 मीटर) के दूसरे अभियान के लिए चुना गया। त्रिशूल चढ़ाई के तकनीकी करने के दृष्टिकोण से कठिन चोटी है। यह उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। त्रिशूल पर्वत नंदा देवी अभयारण्य को घेरी हुई चोटियों के दक्षिण-पूर्व कोने में एक रिंग का निर्माण करता है। इसका नाम भगवान शिव के त्रिशूल के नाम पर रखा गया है।
त्रिशूल की टीम 28 अगस्त, 2019 को दिल्ली से अभियान के लिए निकली और 29 अगस्त, 2019 को 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सुतोल पहुंची।
तत्पश्चात अभियान का सफर इस प्रकार से पूरा हुआ -ः
लटकोपरी – ट्रांजिट कैंप 1 – 3080 मीटर – लोड फेरी – 31 अगस्त
चंदानी घाट – ट्रांजिट कैंप 2 – 3650 मीटर – लोड फेरी – 1 सितंबर – 4 सितंबर
हेमकुंड – बेस कैंप – 4370 मीटर- लोड फेरी और ऑक्युपाई – 5 – 7 सितंबर
कैंप 1 – 5100 मीटर – लोड फेरी और ऑक्युपाई – 9 सितंबर
कैंप 2 – 5900 मीटर – ऑक्युपाई – 10 सितंबर
कैंप 3 – समिट कैंप – 6350 मी – 12 सितंबर
चढ़ाई/समिट की अवधि – 13 सितंबर से 19 सितंबर तक
50 सदस्यीय टीम को 5 छोटी टीमों अर्थात रोप्स में विभाजित किया गया था। हेमंत गुप्ता रोप-ं1 में थे, जिसमें 9 सदस्य थे। इस टीम को कैंप-2 और कैंप-3 के लिए रास्ता खोलने की जिम्मेदारी दी गई और उसके बाद समिट का पहला प्रयास किया गया। हालांकि, बर्फबारी और तेज़ सर्द हवाओं से मौसम खराब हो गया, जिसकी वजह से उन्हें बेस कैंप लौटना पड़ा। रोप-1 ने रोप-2 और रोप-3 के लिए मंच तैयार किया और वे 15 सितंबर, 2019 को चोटी पर पहुंचे। इसके बाद रोप-1 को फिर से 17 सितंबर, 2019 को समिट प्रयास करने का मौका दिया गया। चूंकि मौसम का पूर्वानुमान अच्छा नहीं था, फिर भी क्लाइंबिंग विंडो का लाभ उठाते हुए रोप-1 के साथ हेमंत ने सीधे कैंप-2 से चढाई करने का फैसला किया। यह एक अच्छा निर्णय था और ग्रुप-1 ने 16 सितंबर, 2019 को सुबह 11 बजे समिट पूरा कर लिया।
हेमंत ने अभियान को एक सीखने का एक बड़ा अनुभव बताया। योजना, आयोजन और एक बड़ी टीम का नेतृत्व करने के लिए आश्चर्यजनक नेतृत्व कौशल की आवश्यकता थी। हेमंत कहते हैं कि उन्होंने जो लीडरशिप स्किल्स का अनुभव किया, वह लीडरशिप कोर्सेज में मदद करेगा, जिसे टीएसएएफ गढ़वाल हिमालय और अन्य जगहों पर संचालित करता है। इनमें टीम वर्क पर कौशल, प्रतिकूलता और अनिश्चितता के प्रति सहनशक्ति, प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना और बाधाओं के तहत काम करना शामिल है।
सुश्री बछेन्द्री पाल, मेंटर, टीएसएएफ ने बताया, “शिखर पर चढ़ते समय कई सीख मिलेगी। इनमें कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले लोगों को देखना, एक साथ काम करना, पहल करना, स्वयं और टीम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना और अंततः शिखर से सुरक्षित रूप से नीचे आना शामिल है।”



