सरायकेला (Seraikela Cultural News): विश्व पटल पर अपनी अनूठी पहचान बना चुके झारखंड के पारंपरिक ‘छऊ नृत्य’ (Chhau Dance) की धरती सरायकेला-खरसावां में इन दिनों संस्कृति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ‘राजकीय चैत्र पर्व-सह-छऊ महोत्सव 2026’ के तहत आयोजित किए जा रहे रंगारंग कार्यक्रमों ने कला प्रेमियों का दिल जीत लिया है। महोत्सव के अंतर्गत राजकीय छऊ नृत्य कलाकेंद्र प्रेक्षागृह में आयोजित ‘ग्रामीण छऊ नृत्य प्रतियोगिता’ के दूसरे दिन भी कलाकारों ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से पूरे ऑडिटोरियम में समां बांध दिया। द्वितीय दिवस पर मुख्य रूप से मानभूम शैली (Manbhum Style) के तीन दलों ने अपनी उत्कृष्ट कला और पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया।
मानभूम शैली में दिखा कलाकारों का दम, ये रहे प्रतियोगिता के विजेता
ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता के दूसरे दिन कलाकारों की फुर्ती, वेशभूषा और ताल-मेल ने निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद विजेताओं के नामों की घोषणा की गई:
प्रथम स्थान (1st Prize): झारखण्ड विकास परिषद, उदाटांड ने अपने अचूक पद-संचालन और भाव-भंगिमाओं से पहला स्थान हासिल किया।
द्वितीय स्थान (2nd Prize): भगवान बिरसा मुंडा छऊ नृत्य कलाकेंद्र, गुढ़ा ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दूसरा स्थान प्राप्त किया।
तृतीय स्थान (3rd Prize): शिव शक्ति छऊ नृत्य कलाकेंद्र, गुढ़ा की टीम ने भी जोरदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान अपने नाम किया।
“सीमित संसाधनों में संस्कृति को जीवित रखने वाले कलाकारों को सलाम”
इस भव्य प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सह प्रभारी निदेशक, राजकीय छऊ नृत्य कलाकेंद्र सरायकेला, सुश्री यश्मिता सिंह द्वारा की गई।
उन्होंने सभी प्रतिभागी कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी भूरि-भूरि सराहना की। सुश्री यश्मिता सिंह ने कहा कि, “हमारे इन ग्रामीण कलाकारों के पास भले ही संसाधनों की कमी हो, लेकिन पारंपरिक छऊ नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन में इनका योगदान अमूल्य और अत्यंत प्रशंसनीय है। यही कलाकार क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की असली रीढ़ हैं।”
उन्होंने यह भी बड़ी घोषणा की कि प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाले इन विजेता दलों को महोत्सव के ‘मुख्य मंच’ (Main Stage) पर विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा, और उन्हें वहां हजारों दर्शकों के सामने अपनी प्रस्तुति देने का सुनहरा अवसर भी प्रदान किया जाएगा।
अतिथियों और निर्णायक मंडल का हुआ भव्य सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण कलाकारों ने अपनी परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्य अतिथि सुश्री यश्मिता सिंह (BDO) का पुष्पगुच्छ (Bouquet) और पारंपरिक अंगवस्त्र देकर भव्य स्वागत किया। इसके साथ ही, प्रतियोगिता में निर्णायक (Judges) की अहम और निष्पक्ष भूमिका निभाने वाले दिग्गज कला मर्मज्ञ गुरु ब्रजेन्द्र कुमार पटनायक एवं गुरु मनोरंजन साहू का भी पुष्पगुच्छ देकर हृदय से अभिनंदन किया गया।
कला प्रेमियों और गुरुओं का उमड़ा हुजूम
छऊ नृत्य के इस महाकुंभ में कला प्रेमियों और इस विधा से जुड़े वरिष्ठ लोगों का भारी जमावड़ा रहा। मौके पर मुख्य रूप से गुरु विजय कुमार साहू, भोला महंती, कोऑर्डिनेटर सुदीप कबी, संतोष कर, गजेंद्र महंती, रुपेश साहू, कामेश्वर भोल, अबिनाश कबी, गणेश महंती, सुमित महापात्र, नीरज पटनायक, पंकज साहू, कुना सामल, गोपाल पटनायक, सिद्धू दारोगा, बाउरी बंधु महतो, अद्यापदों साहू, राकेश कबी, असित पटनायक और मुन्ना महाराणा सहित अनेक नामचीन कलाकार एवं कलाकेंद्र के कार्यालय कर्मी उपस्थित रहे। इस महोत्सव ने सरायकेला की सांस्कृतिक फिजा में एक नई ऊर्जा भर दी है।





