
जमशेदपुर पूर्वी की तेजतर्रार विधायक पूर्णिमा साहू ने कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा में कुड़माली भाषा के शैक्षणिक पदों के सृजन और आवश्यक संशोधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस गंभीर विषय पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक विस्तृत पत्र लिखकर तुरंत विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की जोरदार मांग की है। विधायक की यह पहल क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण और छात्रों के हित में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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आदिवासी कुड़मि समाज के मांग पत्र पर की पहल
विधायक पूर्णिमा साहू ने यह अहम कदम आदिवासी कुड़मि समाज, केंद्रीय समिति की ओर से प्राप्त एक मांग पत्र के आधार पर उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने पत्र के साथ समिति द्वारा दिए गए मूल पत्र को भी संलग्न किया है ताकि स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट किया जा सके। विधायक ने पत्र में प्रमुखता से इस बात का उल्लेख किया है कि कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के स्नातकोत्तर (पीजी) विभाग तथा इसके अंतर्गत आने वाले विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में पिछले कई वर्षों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कुड़माली भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर मंडरा रहा खतरा
विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि भारी संख्या में विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने के बावजूद, अब तक इस भाषा के लिए आधिकारिक रूप से शैक्षणिक पदों का सृजन नहीं किया गया है। शिक्षकों के स्थायी पद न होने के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य और उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा पूर्व में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पदों के सृजन का निर्णय लिया गया था, जिसमें कुड़माली भाषा को भी स्वीकृति मिली थी, लेकिन वर्तमान विभागीय संकल्प में इसका समुचित उल्लेख न होना बेहद निराशाजनक है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मातृभाषा का महत्व
पूर्णिमा साहू ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकृष्ट कराया कि कुड़माली भाषा झारखंड राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा रखती है। इसके अलावा, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा आधारित शिक्षा को निरंतर प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन और स्थानीय विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए कोल्हान विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों में कुड़माली भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पदों का शीघ्र सृजन किया जाना नितांत आवश्यक है।
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उच्च शिक्षा सचिव और कुलपति को भी भेजी प्रतिलिपि
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह करते हुए विधायक ने जल्द से जल्द विभागीय कार्रवाई का अनुरोध किया है, ताकि क्षेत्रीय भाषा के विद्यार्थियों को एक बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इसके साथ ही, पूर्णिमा साहू ने अपने इस पत्र की प्रतिलिपि प्रधान सचिव (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार) तथा कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के कुलपति को भी सूचनार्थ एवं त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी है।


