
सरायकेला: सरायकेला खरसावां जिला प्रशासन द्वारा ‘राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस’ के अवसर पर जिले के प्रसिद्ध सीतारामपुर जलाशय (डैम) में एक भव्य और जागरूकता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला के भाजपा विधायक चंपई सोरेन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान चंपई सोरेन ने सीतारामपुर डैम में बनाए गए विशेष केज में मछली का बिचड़ा (बीज) डालकर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का बड़ा संदेश दिया।

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मत्स्य पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
किसानों और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने स्पष्ट किया कि मछली पालन केवल रोजगार नहीं है, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज भारत मत्स्य उत्पादन (Fish Production) के क्षेत्र में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। वर्तमान में वैश्विक मछली उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 8 प्रतिशत तक पहुँच गया है। सरकार और स्थानीय प्रशासन का मुख्य लक्ष्य सरायकेला के किसानों को इस वैश्विक विकास का सीधा हिस्सा बनाना है।
आधुनिक तकनीक और तालाब प्रबंधन का दिया गया प्रशिक्षण
मत्स्य कृषक दिवस के इस विशेष अवसर पर कृषि और मत्स्य विशेषज्ञों द्वारा किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने के गुर सिखाए गए। इस दौरान किसानों को निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर जागरूक किया गया:
आधुनिक मत्स्य पालन: पुरानी विधियों को छोड़कर कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली नई और आधुनिक तकनीकों को अपनाना।
तालाब प्रबंधन (Pond Management): तालाब के पानी की गुणवत्ता बनाए रखना, सही समय पर मछलियों को उचित चारा देना और बीमारियों से उनका बचाव करना।
सरकारी योजनाएं: मत्स्य विभाग द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न सब्सिडी (Subsidy) और कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
आयवृद्धि के अवसर: मछली के व्यवसायिक विपणन (Marketing) और बाजार से सीधे जुड़कर अपनी आय को दोगुना करने के तरीके।
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कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
इस जनहितैषी और लाभकारी कार्यक्रम में सरायकेला जिला परिषद के अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, मत्स्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए बड़ी संख्या में मत्स्य पालक किसान उपस्थित रहे। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उन्हें हर संभव तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।



